देश नोवल कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है। हाल के दिनों में संक्रमण के आंकड़ों में थोड़ी कमी जरूर देखी गई है, लेकिन स्थिति अब भी बेहतर नहीं है। कोविड के इस दौर में विशेषज्ञ सभी लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की सेहत पर विशेष ध्यान देने पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इस दौरान होने वाली किसी भी तरह की समस्याओं में बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
फैक्ट चेक: 'इस होम्योपैथिक दवा की दो बूंद से बढ़ा जाता है शरीर में ऑक्सीजन का स्तर', जानें वायरल मैसेज की सच्चाई?
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क्या है वायरल संदेश
सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर वायरल एक पोस्ट में कोविड का उपचार बताया जा रहा है। पोस्ट में लिखा है- कार्बो वेजिटाबिल्स 30 नामक होम्योपैथिक दवाई की 2-3 बूंद से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा पूरी की जा सकती है। यह दवा इसलिए भी कारगर हो सकती है क्योंकि देश इस समय ऑक्सीजन की भारी कमी का सामना कर रहा है। जिस भी व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत हो वह इस दवा को प्रयोग में ला सकते हैं।
क्या वास्तव में यह दवा असरदार है?
दावा: 'Carbo vegetabilis' नामक एक होम्योपैथिक दवाई की 2-3 बूंद से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा पूरी की जा सकती है। #PIBFactCheck: यह दावा #फ़र्ज़ी है। सांस लेने में कठिनाई होने पर किसी डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। #IndiaFightsCorona #Unite2FightCorona pic.twitter.com/yLxyJN3pRO
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल खबर का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि यह दावा फर्ज़ी है। सांस लेने में कठिनाई होने पर किसी डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। इस तरह की दवाइयों का खुद से सेवन करना गंभीर मुसीबतों का कारण बन सकता है।
नोएडा में एंटी कोरोना टास्क फोर्स के डॉ सिद्धार्थ गुप्ता कहते हैं कि आजकल लोग सोशल मीडिया पर वायरल दवाओं का सेवन करने लगे हैं। इस तरह की वायरल पर्चियों में बिना रोगी के उम्र और अन्य बीमारियों को ध्यान में रखते हुए दवाइयां लिखी होती हैं, ऐसे में बिना डॉक्टरी सलाह के इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है।
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नोट: यह लेख केंद्र सरकार के के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।