कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार ने अब 12-14 आयुवर्ग के बच्चों के लिए भी टीकाकरण की मंजूरी दे दी। बुधवार (16 मार्च) से इस आयु वाले बच्चों का भी वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा। अब तक 15 साल से अधिक आयु वाले बच्चों के टीकाकरण की ही अनुमति थी। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि 'बच्चे सुरक्षित हैं तो देश सुरक्षित है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब 12-14 साल की आयु वाले बच्चों का भी बुधवार से टीकाकरण शुरू किया जा रहा है। कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन ही सबसे कारगर हथियार है। माता-पिता, अपने बच्चों का टीकाकरण जरूर कराएं।'
Children vaccination: अब 12-14 साल के बच्चों का भी होगा वैक्सीनेशन, जानिए कौन-कौन से टीके हैं उपलब्ध?
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भारत बायोटेक की कोवाक्सिन
अब तक देश में बच्चे के लिए भारत बायोटेक द्वारा तैयार की गई स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन प्रयोग में लाया जा रहा थी। अध्ययन में बच्चों में संक्रमण के मध्यम से लेकर गंभीर लक्षणों तक में इस वैक्सीन की प्रभाविकता करीब 78 फीसदी की पाई गई थी। यह निष्क्रिय वायरस पर आधारित कोविड-19 का टीका है। इसे तैयार करने के लिए कोरोना के निष्क्रिय वायरस को प्रयोग में लाया गया है जो शरीर में पहुंचकर बिना संक्रमण फैलाए प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडीज बनाने का संकेत देती है।
कॉर्बेवैक्स वैक्सीन
बायोलॉजिकल ई लिमिटेड की कॉर्बेवैक्स, दूसरा टीका है जिसे 12 साल तक के बच्चों पर इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। 21 फरवरी को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने 12-18 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए इस वैक्सीन को अंतिम मंजूरी दी थी। अध्ययनों में इस टीके को बच्चों पर 78 फीसदी तक असरदार पाया गया था। कॉर्बेवैक्स, भारत की पहला स्वदेशी विकसित रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। इसे तैयार करने के लिए स्पाइक प्रोटीन की तरह फ्रेग्मेंट्स का इस्तेमाल किया गया है जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करता है। इस टीके में हानिरहित एस-प्रोटीन होता है, जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली पहचान लेती है और अगली बार संक्रमण की स्थिति में एंटीबॉडी के उत्पादन में मदद करती है।
जायडस कैडिला की जाइकोब-डी वैक्सीन
दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन जाइकोब-डी को भी अध्ययनों में बच्चों के लिए असरदार पाया गया है। इसी साल 3 जनवरी को इस वैक्सीन को 15-18 साल के बच्चों में आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी। अन्य टीकों के विपरीत, जाइकोब-डी निडिल फ्री वैक्सीन है। इसे फार्माजेट नामक एक एप्लीकेटर के माध्यम से इंजेक्ट किया जाता है। यह वैक्सीन प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है जो प्लास्मिड नामक डीएनए अणु के गैर-प्रतिकृति वर्जन का उपयोग करके तैयार की गई है। यह शरीर में सार्स-सीओवी-2 वायरस के मेंब्रेन पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन का एक हानिरहित वर्जन तैयार करने में मदद करेगी।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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