हम सभी चाहते हैं कि हमारे बच्चे स्वस्थ रहें। दुर्भाग्य से, जीवनशैली और आहार संबंधी कई तरह की गड़बड़ी न सिर्फ बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रही है, साथ ही इससे भविष्य में भी कई तरह की समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे से बचे रहने के लिए बच्चों को शुरुआत से ही अच्छी आदतों का अभ्यास कराना चाहिए। पिछले कुछ सालों में जिस तरह से वीडियो गेम्स और मोबाइल की तरफ बच्चों का रुझान बढ़ा है, ऐसे में न सिर्फ उनका बाहरी दुनिया से संपर्क कम हो गया है साथ ही यह आदत शरीर को भी कई तरह से नुकसान पहुंचा रही है।
आज का हेल्थ टिप्स: बच्चों की ऐसी आदतें बन सकती हैं कई बीमारियां का कारण, माता-पिता दें ध्यान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गैजेट्स का बढ़ता इस्तेमाल नुकसानदायक
मौजूदा समय में जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर बढ़ते रहने के लिए मोबाइल फोन और अन्य गैजेट्स की आवश्यकता है, पर इसका अधिक इस्तेमाल सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। विशेषकर बच्चों में इसकी आदत कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, जिसका दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकता है। मोबाइल फोन से निकलने वाली नीली लाइट आंखों की समस्याओं का कारण बनती है। इसके अलावा मोबाइल फोन्स के ज्यादा इस्तेमाल से नींद की भी समस्या हो सकती है, जिसे कई तरह की बीमारियों का कारण माना जाता है।
जंक फूड्स और चॉकलेट का अधिक सेवन
जंक फूड्स बच्चों की पहली पसंद माने जाते हैं, पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इसका अधिक सेवन मोटापे के खतरे को बढ़ा सकता है। एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि हर 11 में से 1 बच्चा मोटापे का शिकार है। कम उम्र में बढ़ा हुआ वजन दीर्घकालिक रूप से हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसके अलावा चॉकलेट का अधिक सेवन दांत के सड़न, चिप्स का अधिक सेवन शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा सकता है। सोडियम का स्तर बढ़े रहने से भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है।
घटती शारीरिक गतिविधि
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल फोन्स और गैजेट्स के बढ़े इस्तेमाल का एक दुष्प्रभाव यह भी देखने को मिल रहा है कि बच्चे बाहर खेलने नहीं जा रहे हैं। यह आदत न सिर्फ उनके शारीरिक गतिविधि को सीमित कर देती है, साथ ही इससे मानसिक स्वास्थ्य और विकास भी प्रभावित हो सकता है। बाहरी दुनिया के साथ कम संपर्क वाले बच्चों में विकास से संबंधित कई तरह की समस्याएं देखी जाती हैं।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।