कोरोना का खतरा एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर सिर उठाता हुआ दिख रहा है। चीन में हालात काफी गंभीर हो गए हैं, यहां संक्रमितों और मृतकों दोनों की संख्या बढ़ी है। चीन के अलावा जापान और यूएस में भी कोरोना विस्फोट की खबरें हैं। जापान में कोरोना से संक्रमित कई बच्चों की मौत हो गई है। जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यहां भी ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही कहर देखा जा रहा है। हालिया मामलों के सर्वेक्षण में पाया गया है कि COVID-19 से मरने वाले लगभग आधे शिशुओं-बच्चों को पहले से कोई बीमारी नहीं थी, इस आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि नए वैरिएंट्स जानलेवा समस्याओं का भी कारण बन सकते हैं, इसको लेकर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। चीन में पैरासिटामोल जैसी आवश्यक दवाइयों तक की कमी हो गई है।
Covid Outbreak: बच्चों में बढ़े मौत के मामले, आवश्यक दवाइयों की किल्लत, चीन के साथ जापान में भी बिगड़े हालात
चीन में पैरासिटामोल की किल्लत
कोरोना के कारण बिगड़ते हालात के बीच चीन के शहर ताइवान में बुखार-जुकाम में इस्तेमाल की जाने वाली दवा पैरासिटामोल की कमी हो गई है। चीनी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ते जोखिमों को देखते हुए लोगों ने भारी मात्रा में दवाओं को स्टॉक करना शुरू कर दिया था, नतीजतन अब मेडिकल स्टोर्स में इसकी कमी हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने जनता से दवाओं को स्टॉक न करने की अपील की है।
स्वास्थ्य मंत्री सुएह जुई-युआन को कहा, यह सच है कि पूरे ताइवान में पैरासिटामोल की मांग काफी बढ़ गई है। हम आपूर्ति और मांग की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। मांग में आई अचानक वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
चीन के हालात को लेकर डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता
चीन में कोरोना संक्रमण के कारण बिगड़े हालात को लेकर बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंता जताते हुए बचाव के सभी आवश्यक उपाय करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा- चीन को वैक्सीनेशन की दर बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके अलावा सभी लोगों को व्यक्तिगत तौर पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहना चाहिए।
इस बीच चीन सरकार ने कोरोना की इस लहर में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है, हालांकि एजेंसियों का आरोप है कि चीनी सरकार आंकड़ों को छिपा रही है, मृतकों का संख्या काफी अधिक है।
जापान: बच्चों में देखी जा रही है अधिक मृत्युदर
इधर, जापान से कोरोना संक्रमण के मिल रहे आंकड़े डराने वाले हैं, यहां संक्रमण, बच्चों के लिए समस्या बढ़ाता हुआ देखा जा रहा है। जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रसार से पहले पिछले साल के अंत में 20 वर्ष से कम आयु में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या मात्र तीन थी, हालांकि इस साल के पहले आठ महीनों में यह आंकड़ा बढ़कर 41 हो गया। यहां ओमिक्रॉन संक्रमण बच्चों के लिए मुश्किलें बढ़ाता देखा जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के साथ खतरा उन लोगों के लिए भी बना हुआ है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है या फिर वैक्सीनेशन नहीं हुआ है।
नेजल वैक्सीन हो सकती है कारगर
कोरोना के बढ़ते जोखिमों के बीच यूएस वैज्ञानिकों ने एक हालिया अध्ययन के आधार पर बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए नेजल वैक्सीन अधिक प्रभावी हो सकती है। अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 संक्रमण के नौ महीने बाद नाक में बनने वाले एंटीबॉडी कम हो जाते हैं, जबकि रक्त में मौजूद एंटीबॉडीज कम से कम एक साल रह सकते हैं।
नेजल वैक्सीन में मौजूद एंडीबॉडीज इम्युनोग्लोबुलिन A या IgA, कोरोना वायरस को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही निष्क्रिय कर देती है जिससे रोग विकसित होने का जोखिम कम हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के टीकों को बढ़ावा देकर संक्रमण के प्रसार और गंभीरता को कम किया जा सकता है।
नए वैरिएंट्स के लक्षणों और जोखिम के बारे में जानिए
चीन सहित अन्य देशों में बढ़े कोरोना के मामलों के लिए ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट BF.7 को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसको लेकर हुए अध्ययनों में फिलहाल किसी नए लक्षण के बारे में पता नहीं चला है। संक्रमितों में बुखार, खांसी, थकान, नाक बहने और गले में खराश जैसै पुराने लक्षण ही देखे जा रहे हैं। यह नया वैरिएंट अधिक संक्रामकता दर वाला जरूर देखा जा रहा है, जो आसानी से उन लोगों में भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ा रहा है जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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