देश में कोरोना की दूसरी लहर के अप्रत्याशित आंकड़े और इससे होने वाली मौत ने लोगों को काफी डरा दिया है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि अब रोजोना संक्रमितों के मामले थोड़े कम जरूर हुए हैं लेकिन कोविड से मरने वालों की संख्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि पिछले तीन महीनों में दुनियाभर में नई मौतों की संख्या में 143 फीसदी की वृद्धि हुई है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहें है कि जब देश में कोरोना के मामले कम होने शुरू हो गए हैं, फिर भी मौतों की रफ्तार क्यों नहीं थम रही?
विशेषज्ञ से जानिए: संक्रमण के नए मामलों में कमी के बावजूद क्यों नहीं घट रही है मृत्युदर? कहां हो रही है चूक?
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दूसरी लहर में ज्यादा मौतें
दिल्ली में कोरोना संक्रमण को लेकर जागरूकता अभियान चला रहे डॉ रविन्द्र डबास बताते हैं कि कोरोना की पहली लहर की तुलना में इस बार मृत्यु दर अधिक देखी जा रही है। दूसरी लहर की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में अस्पतालों में अचानक से मरीजों की संख्या बढ़ने लगी, देखते-देखते ज्यादातर बेड भर गए। ऐसे में उन लोगों का ठीक से इलाज नहीं हो सका जिनकी हालत बाद में गंभीर हो गई।
इलाज के लिए देर से पहुंच रहे हैं लोग
डॉ रविन्द्र कहते हैं कि पहले की तुलना में अब लोग कोरोना के बारे में जागरूक जरूर हैं लेकिन अभी भी लोग समय पर इलाज के लिए अस्पतालों में नहीं पहुंच रहे हैं, मौत के बढ़े मामलों का एक कारण यह भी हो सकता है। इलाज के लिए अब भी लोग तब पहुंच रहे हैं, जब ज्यादातर लोगों की स्थिति बहुत खराब हो चुकी होती है।
वायरस का म्यूटेशन
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि दूसरी लहर में वायरस में म्यूटेशन देखा गया है, जोकि गंभीर लक्षण पैदा कर रहा है, इसे भी अधिक मौतों का एक कारण माना जा रहा है। इस बार लोगों को सांस लेने की गंभीर समस्याएं हो रही हैं, ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी और कुछ आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता के चलते रोगियों की स्थिति तेजी से खराब हो जाती है। फिलहाल अब स्वास्थ्य उपकरणों की कमी को काफी हद तक सुधार लिया गया है।
मृत्यु दर में जल्द कमी आने की उम्मीद
डॉ रविन्द्र बताते हैं कि कोविड की दूसरी लहर युवाओं के लिए भी घातक साबित हो रही है। कोरोना की दूसरी लहर में 20-40 साल के लोगों में गंभीर असर देखे जा रहे हैं। इसके अलावा यह आयुवर्ग शुरुआत में वैक्सीनेशन के दायरे में भी नहीं था जिसके चलते भी इनमे संक्रमण के मामले और गंभीरता ज्यादा देखी गई है। जैसे-जैसे महामारी की पॉजिटिविटी रेट में गिरावट आएगी, उसी के साथ हम मृत्यु दर में भी कमी आने की उम्मीद कर रहे हैं।
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नोट: यह लेख दिल्ली में वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र डबास से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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