चीन सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के कारण हालात काफी बिगड़ गए हैं। चीन में संक्रमण के साथ-साथ मृत्युदर भी अधिक देखा जा रहा है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना के जिस BF.7 वैरिएंट के कारण चीन में तबाही देखी जा रही है, असल में वह हल्के लक्षणों वाला वैरिएंट है पर चूंकि चीन में दी गई वैक्सीन की प्रभावशीलता काफी कम है, जीरो-कोविड पॉलीसी के कारण यहां हर्ड इम्युनिटी भी नहीं बन पाई है, यही कारण है कि चीन में मामलों की गंभीरता काफी अधिक है।
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कोविड-19 के बूस्टर डोज की जरूरत
यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया स्कूल ऑफ मेडिसिन के हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के बूस्टर डोज के फायदों पर चर्चा की। वैज्ञानिकों का कहना है कि सभी देशों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देने में तेजी लाने की जरूरत है, ऐसा करके अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित किया जा सकेगा। संक्रमण के बढ़ते वैश्विक खतरे की चेन को तोड़ने और अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित करने के लिए फिलहाल यही सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।
संक्रमण से बचा सकती है वैक्सीन की बूस्टर डोज
वैक्सीन की बूस्टर डोज कितनी असरदार हो सकती है, इस बारे में जानने के लिए फाइजर और मॉडर्ना के एमआरएनए टीकों पर शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। साइंटिफिक जर्नल एनल्स ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार वैक्सीन की बूस्टर खुराक देकर लोगों में अधिक टिकाऊ और प्रभावी एंटीबॉडीज को बढ़ावा दिया जा सकता है, संक्रमण से बचाने में यह महत्वपूर्ण भूमिक निभा सकती है।
वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोगों में भी इसके प्रभावी परिणाम देखे गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बूस्टर खुराक से बनी एंटीबॉडीज नए वैरिएंट्स के खतरे से भी सुरक्षा देने में प्रभावी हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
बूस्टर शॉट्स के प्रभावों का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 117 लोगों का वैक्सीनेशन करने के बाद उनमें एंटीबॉडी के स्तर को ट्रैक किया। इन लोगों की तुलना वैक्सीन की प्राथमिक दो डोज ले चुके लोगों से की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक सप्ताह से 31 दिनों तक दोनों समूहों के एंटीबॉडी का स्तर समान था, लेकिन उसके बाद प्राथमिक टीकाकरण वाले समूह की तुलना में बूस्टर शॉट से निर्मित एंटीबॉडीज को अधिक प्रभावी पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस तरह से बूस्टर शॉट लेकर लोगों को कोरोना के खतरे से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है।
बूस्टर शॉट्स की एंटीबॉडीज अधिक प्रभावी
प्रमुख शोधकर्ता और विश्वविद्यालय में इम्यूनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जेफरी विल्सन कहते हैं, परिणाम बताते हैं बूस्टर शॉट्स वैक्सीन द्वारा निर्मित एंटीबॉडी के स्थायित्व को बढ़ावा दे सकते हैं। फाइजर की तुलना में मॉडर्ना की वैक्सीन से बनीं एंटीबॉडीज ज्यादा समय तक टिकने वाली साबित हुईं हैं। अध्ययन अवधि के अंत में, मॉडर्ना की एंटीबॉडी का स्तर फाइजर के स्तर से पांच महीने अधिक प्रभावी पाए गए।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अन्य अध्ययनों में अलग-अलग वैक्सीन के बूस्टर शॉट्स को भी अधिक सुरक्षात्मक पाया गया है।