कोरोना संक्रमण ने कई प्रकार से हमारी सेहत को प्रभावित किया है। डेल्टा जैसे वैरिएंट के प्रकोप के दौरान लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं अधिक देखी गईं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि कोरोना वायरस भले ही श्वसन संक्रमण माना जाता रहा है, पर इसका शरीर पर कई प्रकार से दुष्प्रभाव हो सकता है। फेफड़े, हृदय से लेकर मानव मस्तिष्क तक पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव देखे गए। वैश्विक स्तर पर संक्रमण का शिकार रहे लाखों लोग एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक पूरी तरह से रिकवर नहीं हो पाए हैं।
Covid Study: ब्रेन के इस हिस्से को कोरोना ने किया सबसे ज्यादा प्रभावित, जानिए क्या हो सकते हैं इसके दुष्प्रभाव
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सेरिबैलम हिस्से पर कोरोना के दुष्प्रभाव
टोरंटो कनाडा में रोटमैन रिसर्च इंस्टीट्यूट और सनीब्रुक हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने इस शोध में जानने की कोशिश की है कि कोरोना का लोगों के मस्तिष्क पर क्या दुष्प्रभाव हो सकता है? इसमें पाया गया कि मानव मस्तिष्क का सेरिबैलम हिस्सा, मस्तिष्क के अन्य हिस्सों की तुलना में कोविड संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। अध्ययन इस विचार को पुष्ट करता है कि कोविड-19 के कारण कई लोगों के मस्तिष्क में बदलाव भी देखा जा रहा है।
सेरिबैलम, मस्तिष्क का वह हिस्सा है जिसकी मुख्य भूमिका शारीरिक गति को नियंत्रित करना होता है। गाड़ी चलाने, सही तरीके से चलने में, दौड़ने के दौरान शारीरिक समन्वय को व्यवस्थित रखने में मस्तिष्क का यह हिस्सा मदद करता है। सेरिबैलम लोगों को आई मूवमेंट और देखने के लिए भी आवश्यक है।
न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का जोखिम
ह्यूमन ब्रेन मैपिंग जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में प्रमुख शोधकर्ता अलेक्डेंजर वोंग कहते हैं, कुछ लोग सोच सकते हैं कि COVID-19 सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करता है। हमने अध्ययन में पाया कि कोविड-19 के कारण मस्तिष्क में कई प्रकार के परिवर्तन देख जा रहे हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि जिस तरह से कोरोना के कारण मस्तिष्क में परिवर्तन देखे जा रहे है, यह भविष्य में कई न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
क्या हो सकते हैं इसके दुष्प्रभाव
अध्ययनकर्ता बताते हैं, जिस तरह से कोरोना वायरस को मानव मस्तिष्क के सेरिबैलम हिस्से को प्रभावित करते हुए पाया गया है इससे डर है कि लोगों में शिथिलता या संतुलन की समस्याओं के साथ-साथ समन्वय में कठिनाई हो सकती है। जिसके परिणामस्वरूप लोगों को सही तरीके से चलने, शरीरिक असंतुलन, बोलने में समस्याएं (डिसरथ्रिया), दृष्टि से संबंधित समस्याएं (निस्टागमस) हो सकती हैं।
पोस्ट कोविड समस्याओं का भी जोखिम
कोरोना के दुष्प्रभावों को लेकर हुए कुछ हालिया शोध में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि लाखों लोगों में संक्रमण से ठीक होने के लंबे समय के बाद तक भी पोस्ट कोविड के लक्षण ठीक नहीं हुए हैं। इस आधार पर वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि जो लोग कोरोना के गंभीर रोग, विशेषतौर पर डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित रहे हैं उन्हें डॉक्टर से मिलकर शरीर की जांच जरूर करा लेनी चाहिए। पोस्ट कोविड समस्याओं में भी लोगों में मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की दिक्कतों के बारे में पता चला है।
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स्रोत और संदर्भ
Feasibility of diffusion-tensor and correlated diffusion imaging for studying white-matter microstructural abnormalities: Application in COVID-19
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