कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच शुरुआत से ही लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। मास्का का नियमित इस्तेमाल कोरोना की संभावना को काफी हद तक कम कर देता है। सामान्यत: किसी संक्रमित व्यक्ति के मुंह या नाक से निकले ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलने वाले कोरोना वायरस से मास्क हमें सुरक्षा देता है। पिछले आठ-नौ महीने में कई तरह के मास्क सामने आ चुके हैं, जो कोरोना से सुरक्षा देने का दावा करते हैं। इसी कड़ी में अब वैज्ञानिकों ने एक एंटी-वायरल परत वाला एक ऐसा नया मास्क डिजाइन किया है, जो कोरोना वायरस को निष्क्रिय कर देता है।
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Coronavirus Mask
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इस मास्क के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसे पहनने से व्यक्ति संक्रमित होने से बच पाएगा। इस मास्क को अमेरिका में नॉर्थ-वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। उनके मुताबिक, मास्क के कपड़े पर एंटी-वायरल रसायन की परत होगी। यह मास्क का काम तो करेगा ही, साथ-साथ सांस के जरिए बाहर निकली ड्रॉपलेट्स यानी सूक्ष्म श्वसन बूंदों (Droplets) को भी संक्रमण मुक्त करेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हेल्थ जर्नल 'मैटर' में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, प्रयोगशाला में शोधकर्ताओं ने सांस लेने, छोड़ने, छींकने, खांसने के अनुकरणों के जरिए पाया कि ज्यादातर मास्क में इस्तेमाल होने वाले लचीले, एक या ज्यादा परत वाले कपड़े इस तरह के मास्क निर्माण के लिए सही हैं। अध्ययन में पाया गया कि 19 फीसदी फाइबर घनत्व वाला एक लिंट फ्री वाइप (सफाई वाले कपड़े का प्रकार) सांस के जरिए बाहर निकली डॉपलेट्स को 82 फीसदी तक संक्रमण मुक्त कर सकता है। ऐसे कपड़े से सांस लेने में कठिनाई नहीं होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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इस अध्ययन के नेतृत्वकर्ता और नॉर्थ-वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जियाशिंग हुआंग के मुताबिक, मास्क पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी भूमिका कोरोना महामारी से लड़ने में अहम है। उन्होंने कहा यह लोगों को बचाता तो है ही, कोरोना वायरस का संवाहक भी नहीं बनने देता। कारण कि इसमें जुड़ी रसायन की परत वायरस को हवा में फैलने नहीं देती। मास्क से महामारी का प्रकोप बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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शोधकर्ताओं ने बताया कि नया मास्क तैयार करने के लिए उन्होंने दो एंटीवायरस केमिकल- फॉस्फोरिक एसिड और कॉपर सॉल्ट का इस्तेमाल किया। इनकी खासियत यह है कि ये गैर-वाष्पशील रसायन हैं और वायरस के लिए प्रतिकूल माहौल तैयार करते हैं।