फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

अध्ययन: कोरोना से ठीक हो चुके 50 फीसदी लोगों को हो रही है यह समस्या, साल भर तक रह सकती है दिक्कत

Tue, 25 Jan 2022 02:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 25 Jan 2022 02:40 PM IST
विज्ञापन
COVID-19 recoverd may have long-term changes in their sense of smell, says study
पोस्ट कोविड की समस्याएं - फोटो : iStock

पिछले दो साल से अधिक समय से देशभर में कोरोना संक्रमण का प्रकोप जारी है। ओमिक्रॉन देश में तीसरी लहर का कारण बन रहा है, इससे पहली की दो लहरों में लोगों को तमाम तरह की समस्याएं देखने को मिल रही थीं। कोरोना संक्रमण के अलावा ठीक हो चुके लोगों में लॉन्ग कोविड की दिक्क्तें भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। पोस्ट कोविड की समस्याओं पर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपने हालिया रिपोर्ट में बताया है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान संक्रमित रह चुके लगभग 50 प्रतिशत लोगों में एक खास तरह की समस्या के बारे में पता चला है। कुछ लोगों में यह लक्षण ठीक होने के डेढ़ साल से अधिक समय तक बनी रह सकती है।



स्वीडन में किए गए इस शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि संक्रमण से ठीक हो चुके लगभग 50 फीसदी लोगों में गंध न आने की समस्या देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं कुछ लोगों में यह दिक्कत स्थायी तौर पर गंध की भावना में परिवर्तन की समस्या का भी कारण बन सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं। 

COVID-19 recoverd may have long-term changes in their sense of smell, says study
गंध न आने की समस्या - फोटो : istock

गंध की भावना में परिवर्तन की समस्या
एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि महामारी के शुरुआती दिनों से ही संक्रमितों में गंध की अचानक कमी या गंध को लेकर हो रही समस्या को लक्षण के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि समय के साथ देखने को मिला है कि कोविड से ठीक होने के बाद भी ज्यादातर लोगों में इस तरह की दिक्कतें लंबे समय तक बनी रहती हैं। गंध न आने की समस्या को वैज्ञानिक लॉन्ग कोविड के संकेत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि फिलहाल ओमिक्रॉन संक्रमितों में गंध न आने की समस्या, डेल्टा और अल्फा वैरिएंट की तुलना में कम देखने को मिली है। 

COVID-19 recoverd may have long-term changes in their sense of smell, says study
कोरोना से ठीक होने के बाद गंध न आने की समस्या - फोटो : iStock

अध्ययन में क्या पता चला?
कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों में जारी गंध न आने से संबंधित दिक्कतों के बारे में पता लगाने के लिए  स्टॉकहोम में करोलिंस्का के वैज्ञानिकों ने साल 2020 में संक्रमण की पहली लहर में कोविड संक्रमित रह चुके 100 लोगों पर अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड से ठीक होने के 18 महीने बाद करीब 4 प्रतिशत लोगों ने पूरी तरह से गंध की क्षमता खो दी। एक तिहाई लोगों में गंध का पता लगाने की क्षमता कम हो गई और लगभग आधे लोगों ने पारोस्मिया की शिकायत की। पारोस्मिया के कारण लोगों को अलग चीजों से अलग तरह की गंध आ सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
COVID-19 recoverd may have long-term changes in their sense of smell, says study
कोविड-19 और गंध की भावना में परिवर्तन - फोटो : pixabay

क्यों हो रही हैं ऐसी दिक्कतें?
वैज्ञानिकों की टीम ने निष्कर्ष निकाला कि कोविड से उबरने वालों में से करीब 65 प्रतिशत को डेढ़ साल के बाद तक भी गंध की कमी या चीजों के वास्तविक गंध को महसूस करने की क्षमता में कमी की समस्या हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस संभवत: हमारे ओलफेक्ट्री ग्रंथि को क्षति पहुंचाता है जिसके कारण इस तरह की समस्या देखने को मिलती है। इसके अलावा जिन लोगों में कोविड के गंभीर संक्रमण देखे गए हैं, उनमें इस तरह की समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

विज्ञापन
COVID-19 recoverd may have long-term changes in their sense of smell, says study
लॉन्ग कोविड की समस्याएं - फोटो : Pixabay

क्या ओमिक्रॉन संक्रमितों को भी हो रही है यह समस्या?
यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन के संक्रमण की स्थिति में लोगों में इस तरह की दिक्कतें कम देखने को मिल रही हैं। हालांकि इसके लिए फिलहाल कोई विश्वसनीय डेटा नहीं है जो दर्शाता हो कि ओमिक्रॉन ओलफेक्ट्री सिस्टम के लिए कम खतरनाक है। गंध की गंभीर कमी लोगों में अवसाद और कई तरह की अन्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है, इस बारे में सभी को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। कोरोना संक्रमण को कभी भी हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। 


----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed