पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी ने लोगों को शारीरिक-मानसिक दोनों तरह से परेशान किया है। डेल्टा जैसे वैरिएंट से संक्रमण के कारण एक तरफ जहां लोगों में कई तरह के गंभीर लक्षण देखने को मिले, वहीं ओमिक्रॉन की संक्रामता दर काफी अधिक बताई जा रही है। कोविड-19 से ठीक होने के बाद भी लोगों में लॉन्ग कोविड की कई समस्याएं लगातार चिंता का कारण बनी हुई हैं। अब तक विशेषज्ञ बताते रहे थे कि लॉन्ग कोविड के कारण लोगों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, हृदय रोग और फेफड़ों की समस्या काफी अधिक देखी जा रही है। वहीं एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोना का संक्रमण लोगों की दिमागी क्षमता को भी कमजोर करता जा रहा है।
Cambridge Study: दिमागी क्षमता को कमजोर कर रहा है कोविड-19, लॉन्ग कोविड में लोगों को हो रही हैं ऐसी दिक्कतें
दिमागी शक्ति में कमी की समस्याएं
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि संक्रमण से ठीक हो चुके ज्यादातर लोगों में याददाश्त और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विस्तृत अध्ययन से पता चलता है कि प्रत्येक दस में से एक कोविड-19 रोगी प्रारंभिक संक्रमण के बाद कुछ महीनों तक न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का अनुभव कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमण से उबर चुके लोगों को इस बारे में गंभीरता से लक्षणों पर नजर रखने की आवश्यकता है।
लॉन्ग कोविड और न्यूरोलॉजिकल विकार
लॉन्ग कोविड में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के शिकार लोगों के डेटा के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस करते रहते हैं। लगभग 75 फीसदी लोगों ने बताया कि संक्रमण से ठीक होने के बाद से उन्हें काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस हो रही है। इसके अलावा कई लोगों ने अक्सर छोटी-छोटी चीजों को याद रख पाने में भी समस्याओं के अनुभव को साझा किया।
क्या कहते हैं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित रह चुके लोगों में याददाश्त से संबंधित समस्याएं देखने को मिल रही है। महामारी ने तनाव-अवसाद जैसी समस्याओं को तो बढ़ाया ही है साथ ही इसका दिमागी क्षमता पर और भी कई तरह से असर देखा जा रहा है।
कई रोगियों को लोगों के चेहरे तो याद हैं पर नाम याद करने में दिक्कत महसूस हो रही है। संक्रमण ने मस्तिष्क में किसी घटना को संग्रहित करने की क्षमता को प्रभावित किया है। आगे के शोध में इस बारे में और स्पष्टता से पता चल सकेगा। फिलहाल ऐसे लोगों को जीवनशैली और आहार को बेहतर रखने के साथ स्क्रीन टाइम कम करने और अच्छी नींद लेने की सलाह दी जा रही है।
लंबे समय तक भी बनी रह सकती है दिक्कत
इंटेंसिव केयर यूनिट के विशेषज्ञ डॉ सौरभ अवस्थी कहते हैं, कोविड-19 से उबरने वाले ज्यादातर लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या देखने को मिल रही है। थकान, सांस लेने में कठिनाई, जोड़ों-छाती में दर्द, अनिद्रा, दिल की धड़कन में अनियमितता जैसी समस्याएं लॉन्ग कोविड में सामान्य देखी जा रही हैं। कुछ लोगों में न्यूरोलॉजिकल विकारों का भी निदान किया जा रहा है। ज्यादातर मामलों में शुरुआती 15 दिनों के बाद लक्षण कम होने लगते हैं, हालांकि कुछ लोगों में यह समस्याएं कुछ महीनों से लेकर साल भर तक भी बनी रह सकती हैं।