पिछले ढाई साल से अधिक समय से जारी वैश्विक कोरोना महामारी ने लोगों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेषकर दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण के कारण संक्रमितों में गंभीर लक्षण देखने को मिले थे, ऐसे लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या भी अधिक देखी गई है। भले ही इस समय संक्रमण का कारण बन रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट्स को हल्के स्तर के संक्रमण वाला माना जाता रहा हो, पर इसके कारण भी कुछ लोगों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं रिपोर्ट की जाती रही हैं। कोरोना संक्रमण ने शरीर के जिन अंगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, फेफड़े-हृदय उनमें से एक हैं। तो क्या कोरोना महामारी ने हृदय रोगों के मामलों को बढ़ा दिया है?
बड़ा सवाल: क्या कोरोना महामारी के कारण हृदय रोगों में देखा जा रहा है बड़ा उछाल? जानिए डॉक्टर्स की राय
दो साल में बढ़े हैं हृदय रोगों के मामले
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अमित पेंडारकर बताते हैं, दिल के दौरे से संबंधित मौतों में वृद्धि के लिए कोरोना संक्रमण को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा सकता है। पहले भी हृदय रोग बड़ा संकट रहा है, हालांकि कोरोना महामारी के बाद इसके बढ़ते मामलों ने चिंता और बढ़ा दी है। कई ऐसे लोगों, विशेषकर युवाओं में हृदय रोगों के गंभीर मामलों का निदान किया जा रहा है, वे कोरोना संक्रमित होने से पहले पूरी तरह से स्वस्थ थे।
इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी को हृदय रोगों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है, इसकी रोकथाम और निदान के लिए लोगों को भी बेहद सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।
कोरोना संक्रमण का हृदय की सेहत पर असर
कोरोना संक्रमण के कारण हृदय पर होने वाले प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि यह संक्रमण कुछ स्थितियों में नसों और धमनियों की आंतरिक सतह को भी प्रभावित करता है, जिससे रक्त वाहिका में सूजन हो सकती है। इसके अलावा संक्रमण की स्थिति में छोटी वाहिकाओं के क्षति और रक्त के थक्के बनने की भी समस्या देखी जाती रही है, ये सभी स्थितियां हृदय और शरीर के अन्य भागों में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर देती हैं। हृदय में रक्त का संचार प्रभावित होने से कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है।
संक्रमित रह चुके लोगों में देखी जा रही है गंभीर जटिलता
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अनवर.एम खान बताते हैं, पिछले दो साल के डेटा उठाकर देखें तो पता चलता है कि युवाओं में हृदय रोग और अचानक से हृदय गति रुकने के मामले बढ़े हैं, यह समस्या उन युवकों में अधिक देखी जा रही है जो कोरोना से संक्रमित रह चुके हैं। कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों में हमने ट्रोपोनिन बढ़ने और कार्डियक एमआरआई में हृदय की कार्यक्षमता में कमी आने की स्थिति भी देखी है। ये गंभीर संकेत हैं, इसके अलावा जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोगों की समस्या रह चुकी है,अगर उनमें संक्रमण हो जाता है तो इसके कारण गंभीर जटिलताओं और मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है।
कोरोना महामारी ने हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, ऐस में जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण रह चुका है, उन्हें ठीक होने के बाद सुरक्षात्मक तौर पर हृदय की जांच जरूर करा लेनी चाहिए।
सभी लोग बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से देश में हृदय रोगों के मामले में तेजी से उछाल देखा जा रहा है, इस खतरे को देखते हुए सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। यदि संक्रमण से ठीक होने के बाद आपको कुछ समय से हृदय में समस्याओं का अनुभव हो रहा है तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। स्वस्थ लोगों को भी आहार और नियमित व्यायाम पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। हृदय रोग और इसकी जटिलाताएं युवाओं में भी बढ़ रही है, इस खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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