भारत में पिछले करीब डेढ़ महीने से कोरोना संक्रमण के दैनिक मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से औसतन रोजाना 500-600 लोगों में नए मामलों की पुष्टि की जा रही है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के डेटा से पता चलता है कि ये नया वैरिएंट भारत के भी अधिकांश हिस्सों में फैल चुका है।
Covid-19: दिल्ली में JN.1 वैरिएंट का कितना असर, अस्पतालों में बढ़े हैं मरीज? डॉक्टर से जानिए कोरोना के हालात
दिल्ली में कोरोना की स्थिति
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी में भी कोरोना के नए वैरिएंट के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ा है। आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में नए वैरिएंट JN.1 के कारण अब तक 24 मामले सामने आए हैं, जिनमें तीन मरीज दिल्ली के बाहर से थे। ये सभी संक्रमण से ठीक हो चुके हैं।
अधिकारियों ने सोमवार को कहा, चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि मरीजों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं। JN.1 सब-वैरिएंट की पहली मरीज को लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में वह ठीक हो गई।
ज्यादातर मरीजों में हल्के लक्षण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना से संक्रमित होने वाले सभी लोग ठीक हो चुके हैं। अधिकारियों ने कहा, ''हमने अब तक जो सीखा है वह यह है कि अगर किसी में संक्रमण के लक्षण दिख रहे हैं, अगर वो सेल्फ आइसोलेट हो जाए, खान-पान का ध्यान रखें आराम करे तो लक्षण अपने आप ठीक होने लगते हैं। दिसंबर 2023 में दिल्ली में JN.1 वैरिएंट का पहला मामला दर्ज किया था। शायद अब तक किसी में यहां गंभीर लक्षण नजर आए हों, ज्यादातर मरीज दो से तीन दिनों के भीतर ठीक हो रहे हों। हालांकि वैरिेएंट की प्रकृति को देखते हुए सभी लोगों को कोरोना से बचाव करते रहने की सलाह दी जाती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
अस्पतालों में कोरोना की स्थिति के बारे में जानने के लिए हमने नोएडा के एक निजी अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर अमृत गु्प्ता से बातचीत की। डॉ गुप्ता बताते हैं, कोरोना के मामले पूरे देश में रिपोर्ट हो रहे हैं, दिल्ली-एनसीआर में भी संक्रमण देखा गया है पर अस्पतालों में भीड़ ज्यादा नहीं है। इस वैरिएंट के कारण संक्रमण के शिकार ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, कुछ मरीज जो पिछले साल ओमिक्रॉन के कारण संक्रमण के चलते अस्पतालों में भर्ती हुए थे, उनमें कोमोरबिडीटी की हिस्ट्री रही थी। जिसका मतलब है कि अगर आपको पहले से कोई क्रोनिक बीमारी नहीं है तो कोरोना के संक्रमण की स्थिति में रोग के गंभीर रूप लेने का खतरा बहुत कम है।
लक्षणों पर गंभीरता से दें ध्यान
डॉक्टर अमृत कहते हैं, यहां एक बात पर ध्यान देने की और भी आवश्यकता है, कोरोना के साथ ये देश में सर्दियों का भी मौसम है। इस मौसम में फ्लू संक्रमण और सर्दी-जुकाम होना काफी सामान्य है। इसके ज्यादातर लक्षण कोरोना से मिलते-जुलते देखे जाते रहे हैं। ऐसे में हर बार सर्दी-जुकाम होने का मतलब कोरोना ही नहीं है। लक्षणों पर नजर रखें और पौष्टिकता-आराम पर ध्यान दें। अगर 4-5 दिनों में लक्षणों में आराम नहीं मिल रहा है तो कोविड-19 की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाइयों का सेवन करें। कोरोना से घबराएं नहीं, बल्कि बचाव के उपाय करते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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