क्रोनिक बीमारियों के कारण दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, साल 2021 में कोविड-19 वैश्विक स्तर पर मौत का दूसरा प्रमुख कारण रहा है। प्रति एक लाख आबादी पर 94 मौतें हुईं और जीवन प्रत्याशा में 1.6 साल की कमी आई। वहीं सबसे ज्यादा मौतें इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण रिपोर्ट की गईं।
Lancet Study: इस रोग के कारण 2021 में कई गुना बढ़ गए मौत के मामले, लाइफ एक्सपेक्टेंसी में भी आई कमी
इतिहास की सबसे निर्णायक वैश्विक स्वास्थ्य घटना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, कोरोना महामारी हाल के इतिहास की सबसे निर्णायक वैश्विक स्वास्थ्य घटनाओं में से एक के रूप में उभरी है। ये गंभीर स्वास्थ्य जोखिम रहा है जिसका असर लगभग हर उम्र के व्यक्तियों की सेहत पर देखा गया।
इससे पहले के वर्षों में दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतें इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण होती रही थीं। रक्त वाहिकाओं के थक्के जमने या सिकुड़ने के कारण रक्त के प्रवाह में कमी आ जाने की समस्या हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बनती है।
कोरोना के कारण बढ़ा मौतों का आंकड़ा
अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया, साल 2019 की तुलना में 2020 में दुनियाभर में मौत के मामलों में 10.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं 2020 की तुलना में ये वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हुए, कई लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं देखी गईं। इसके अलावा इस दौरान कोरोना से बचाव के लिए कोई खास वैक्सीन या उपचार विधि उपलब्ध नहीं थी, यही कारण रहा है साल 2021 में मौत के मामले पिछले कुछ वर्षों की तुलना में ज्यादा रिपोर्ट किए गए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवोल्यूशन में प्रमुख अनुसंधान वैज्ञानिक और अध्ययन के लेखक डॉ. लियान ओंग कहते हैं, हमारा ये अध्ययन विश्व के स्वास्थ्य की एक तस्वीर प्रस्तुत करता है। एक ओर, हम डायरिया और स्ट्रोक से होने वाली मौतों को रोकने में कई देशों की उल्लेखनीय उपलब्धियां देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हम देखते हैं कि कोविड-19 महामारी ने हमें कितना पीछे धकेल दिया है।
लेखकों ने पाया कि जिन क्षेत्रों में कोविड-19 महामारी का सबसे ज्यादा असर देखा गया उनमें लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के साथ उप-सहारा अफ्रीका के देश थे जिनकी लाइफ एक्सपेक्टेंसी में ज्यादा कमी आई है।
इन बीमारियों से मौत के मामलों में सुधार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा- इन सबके बीच अध्ययन में पता चलता है कि आंतों की बीमारियों से होने वाली मौतों में काफी सुधार भी आया है। इन सुधारों के चलते 1990 से 2021 के बीच दुनिया भर में जीवन प्रत्याशा में 1.1 वर्ष की वृद्धि हुई। इसके अलावा लोवर रेस्पोरेटरी इंफेक्शन से होने वाली मौतों में भी कमी दर्ज की गई है।
स्ट्रोक, नवजात संबंधी विकार, इस्केमिक हृदय रोग और कैंसर सहित अन्य कारणों से होने वाली मौतों को रोकने में भी तुलनात्मक स्तर पर सुधार हुआ है। हालांकि तीन दशकों में हुए सुधार एक बार फिर से कोरोना महामारी के कारण काफी प्रभावित हुए हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Global burden of 288 causes of death and life expectancy decomposition in 204 countries and territories and 811 subnational locations, 1990–2021
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