Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
डॉ. परवेश मलिक
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)
देश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। यही कारण है कि महामारी की तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है। चूंकि इस बीच वायरस के नए-नए वैरिएंट भी सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय बने हुए हैं। हालांकि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक डॉ. एसके सिंह ने कहा है कि हम दो तरीकों से कोरोना के मामलों की निगरानी कर रहे हैं। पहला तो ये कि बाहर से आने वाले लोगों में कोरोना का कोई नया वैरिएंट तो नहीं है और दूसरा देश में फैल रहे डेल्टा वैरिएंट के प्रभावों पर भी नजर रखी जा रही है। उनका कहना है कि हम कोरोना के जिन वैरिएंट की निगरानी कर रहे हैं, वह अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस हैं। इसके अलावा दो और वैरिएंट, जो इस समय जांच के दायरे में हैं, वो कप्पा वैरिएंट और बी1617.3 वैरिएंट हैं। आइए जानते हैं इन वैरिएंट के बारे में...
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कोरोना का नया वैरिएंट
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क्या हैं अल्फा, बीटा, गामा वैरिएंट?
- अल्फा वैरिएंट को बी.1.1.7 के नाम से भी जाना जाता है। पहली बार इसकी पहचान ब्रिटेन में हुई थी, जो बाद में 50 से भी अधिक देशों में फैल गया।
- बीटा वैरिएंट को बी.1.351 के नाम से भी जाना जाता है। इसकी पहचान पहली बार दक्षिण अफ्रीका में हुई थी, जो बाद में ब्रिटेन सहित कम से कम 20 अन्य देशों में भी फैल गया।
- गामा (पी.1) वैरिएंट पहली बार ब्राजील में पहचाना गया था, जो बाद में ब्रिटेन सहित 10 से अधिक अन्य देशों में फैल गया।
- कोरोना के ये तीनों वैरिएंट तेजी से फैलने वाले वैरिएंट हैं, जो बेहद ही खतरनाक भी हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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डेल्टा वैरिएंट क्या है और कितना खतरनाक है?
- बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना के हजारों अलग-अलग वैरिएंट फैले हुए हैं। उनमें से एक है डेल्टा, जिसे बी.1.617.2 के नाम से जाना जाता है। यह ब्रिटेन सहित कई देशों में तेजी से फैल रहा है, जहां यह प्रमुख वैरिएंट बन गया है। इसे बेहद ही खतरनाक माना जा रहा है। हालांकि यह उनके लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है, जिन्हें अब तक वैक्सीन नहीं लगी है। ऐसा माना जाता है कि दूसरी लहर का कारण डेल्टा वैरिएंट ही था।
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डेल्टा प्लस वैरिएंट कितना खतरनाक?
- इसे भी कोरोना का खतरनाक वैरिएंट ही माना जा रहा है। देश में अब तक कोरोना के इस नए वैरिएंट से संक्रमण के 50 से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं। यह न केवल तेजी से फैलता है, बल्कि यह वैक्सीन से बनी हुई इम्यूनिटी को भी चकमा देने में सक्षम है। यह इम्यूनिटी को कमजोर करने और फेफड़ों को अधिक नुकसान पहुंचाने की भी क्षमता रखता है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है और वैक्सीन लगवाने के साथ ही मास्क पहनने और सुरक्षित शारीरिक दूरी जैसे नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
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कप्पा वैरिएंट कितना खतरनाक?
- पिछले महीने ही उत्तर प्रदेश और उसके बाद राजस्थान में पहली बार कोरोना का कप्पा वैरिएंट मिला था। दरअसल, यह कोरोना के बी.1.617 वंश के म्यूटेशन से पैदा हुआ है। इसे बी.1.617.1 वैरिएंट भी कहा जाता है। यह भी काफी खतरनाक है। इसलिए जरूरी है कि मास्क लगाएं और सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन करें। ये नियम आपको कोरोना के किसी भी वैरिएंट से बचा सकते हैं।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
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