कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनिया के कई देशों में वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में लगे हैं। यूरोप में कई देशों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर देखी जा रही है, जिसने चिंता बढ़ा दी है। लोगों से तमाम एहतियात बरतने की अपील की जा रही है। इस बीच कोरोना की वैक्सीन को लेकर भी वैज्ञानिकों को कामयाबी मिल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 10 से ज्यादा वैक्सीन कैंडिडेट्स आखिरी चरण के मानव परीक्षण से गुजर रहे हैं। रूस और चीन ने तीसरे चरण से पहले ही वैक्सीन को मंजूरी दे दी है, वहीं भारत, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन जैसे देश भी कामयाबी के करीब हैं। इस्राइल में भी एक नवंबर से 'ब्रिलाइफ' वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हो रहा है।
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‘इस्राइल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल रिसर्च’ (आईआईबीआर) द्वारा कोराना वायरस महामारी के लिए विकसित किए गए टीके ‘ब्रिलाइफ’ का इंसानों पर परीक्षण होगा। इस्राइल के रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्रालय और हेलसिंकी समिति से सभी आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद एक नवंबर से मानव परीक्षण शुरू किया जाएगा। हेलसिंकी समिति अनुसंधान अनुमोदन और मानव प्रयोगों से संबंधित है।
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मानव पर परीक्षण की प्रक्रिया के तीन चरण हैं, जिनमें 30,000 से अधिक वॉलेंटियर्स शामिल होंगे। परीक्षणों के 2021 मध्य तक चलने का अनुमान है। इसके बाद ही लोगों के लिए यह टीका उपलब्ध हो पाएगा। मानव परीक्षण एक नवंबर से दो प्रतिभागियों के साथ शुरू होगा। उनकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर, टीके को धीरे-धीरे कुल 80 वॉलेंटियर्स को दिया जाएगा। एक चिकित्सा केंद्र पर 40 वॉलेंटियर्स शामिल होंगे।
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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज ने कहा,
आईआईबीआर के शोधकर्ताओं की वजह से इस्राइल के नागरिकों के लिए यह उम्मीद का दिन है। दो महीने पहले टीके की पहली बोतल मिली थी। आज हमारे पास 25,000 खुराक हैं और परीक्षण का अगला चरण शुरू किया जा रहा है।
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बता दें कि तीसरे चरण के मानव परीक्षण के बाद ही यह सुनिश्चित होता है कि वैक्सीन लोगों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार है। हालांकि रूस और चीन में दूसरे चरण के ट्रायल के बाद ही वैक्सीन को मंजूरी दे दी गई है और उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को दी जा रही है। इंडोनेशिया ने भी अगले महीने से बड़े पैमाने पर उच्च जोखिम वर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू करने का निर्णय लिया है।