कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक के बाद एक नए वैक्सीन रूपी हथियार मिल रहे हैं। हाल ही में जाइडस कैडिला की वैक्सीन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली है। यह देश की छठवीं वैक्सीन है, जिसका नाम जायकोव-डी है। इस वैक्सीन को भारत के लिए बेहद ही खास माना जा रहा है, क्योंकि इसे 12-18 साल की उम्र के लोगों के लिए भी इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। टीकाकरण अभियान की अगर बात करें तो देश में अब तक 58 करोड़ 14 लाख से अधिक कोविड टीके लगाए जा चुके हैं। हालांकि अभी भी देश में बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने वैक्सीन की पहली डोज तो समय पर ले ली थी, लेकिन दूसरी डोज लेने में देरी कर दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस वजह से कुछ क्षेत्रों में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
विशेषज्ञ से जानें: क्या वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में देरी से बढ़ रहा कोरोना का संक्रमण?
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जाइडस कैडिला का जो जायकोव-डी टीका आया है, वह अन्य वैक्सीन से किस तरह अलग है?
क्या जाइडस कैडिला की वैक्सीन अन्य वैक्सीन से ज्यादा सेफ (सुरक्षित) है?
- डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'वैक्सीन की सेफ्टी (सुरक्षा) इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह किस तरह दी जाती है। इसके साथ यह इस पर भी निर्भर करती है कि उसमें कौन-कौन से कंपोनेंट्स हैं। हां, ये कह सकते हैं कि अगर हम नीडल से बचाव कर लेते हैं, तो नीडल से जुड़ी हुई जो समस्याएं हैं, वह खत्म हो जाती हैं।'
कहा जा रहा है कि जाइडस कैडिला की वैक्सीन बिना नीडल वाली होगी, इसके बारे में थोड़ा बताइए?
- डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'बिना सुई वाली वैक्सीन तो पहले भी बहुत आती थी, जैसे ओरल पोलियो वैक्सीन या रोटावायरस वैक्सीन आदि। जाइडस कैडिला की वैक्सीन में एक स्पेशल जेट होता है, जिसे स्किन पर रखा जाता है। वैक्सीन इसके माध्यम से बहुत प्रेशर से आती है और फिर शरीर के अंदर चली जाती है। इसे हम इंट्राडर्मल वैक्सीन कहते हैं। इसके कई सारे फायदे होते हैं, जैसे इसे देना बेहद आसान है। नीडल का उपयोग करते हुए जो सावधानी बरतनी होती हैं, वह सब इसमें जरूरी नहीं होती।'
लोगों ने जो वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में देरी की है, क्या उसकी वजह से कुछ क्षेत्रों में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है?
डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'हम जो वैक्सीन ले रहे हैं, यह केवल हमारी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं है। ये पूरे समाज पर असर डालती है। जब बहुत सारे लोग वैक्सीन ले लेते हैं और दोनों डोज पूरी लगवा लेते हैं, तब जिनको वैक्सीन नहीं भी लगी है, वह भी सुरक्षित हो जाते हैं। अगर हम केवल एक ही डोज लेंगे और दूसरी डोज नहीं लेंगे, उससे सुरक्षा तो मिलेगी, लेकिन जितनी अपेक्षित होती है, उतनी नहीं मिलेगी। समय पर जो वैक्सीन दी जाती है, उसे लेना अत्यंत आवश्यक है। इससे वह व्यक्ति खुद भी सुरक्षित रहता है और समाज भी सुरक्षित रहता है। कोरोना को कम करने में वैक्सीन एक महत्वपूर्ण कारक है।'