भारत में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या अब एक करोड़ एक लाख 47 हजार से भी अधिक हो गई है। हालांकि यहां सक्रिय मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है। अब तक देश में 96 लाख 93 हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। इससे कोरोना से ठीक होने वालों की दर बढ़कर 95.75 फीसदी हो गई है। लेकिन ब्रिटेन में मिले वायरस के एक नए स्ट्रेन (प्रकार) ने चिंता काफी बढ़ा दी है। ऐसे में मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि यह नया स्ट्रेन इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है, यह जहां भी फैलेगा, वहां क्या परिणाम देखने को मिल सकते हैं, इसपर वैक्सीन प्रभावी होगी या नहीं? चूंकि अब तक भारत में किसी भी वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी तो नहीं मिली है, हालांकि कहा जा रहा है कि जल्द ही किसी न किसी वैक्सीन को मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन अगर मान लीजिए कि कई वैक्सीन एक साथ आएंगी तो उनमें से कौन सी लें, यह कैसे तय किया जा सकता है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब...
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Coronavirus Vaccine: कई वैक्सीन एक साथ आएंगी तो उनमें से कौन सी लें, यह कैसे तय करें? विशेषज्ञ से जानें
Fri, 25 Dec 2020 11:11 AM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 25 Dec 2020 11:11 AM IST
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कोरोना वायरस वैक्सीन
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कोविड-19 का नया स्ट्रेन इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है?
- वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर बताते हैं, 'वायरस के ऊपर स्पाइक प्रोटीन होता है। हमारे शरीर में प्रवेश करने के बाद हमें बीमार करने के लिए वायरस को गले, नाक या फेफड़े में मौजूद कोशिकाओं का ताला खोलना होता है। ये स्पाइक प्रोटीन उस ताले की चाबी है। पहले और अब में बस इतना फर्क है कि अब तो चाबी वायरस के हाथ लगी है, उससे ताला आसानी से खुल जा रहा है। इसीलिए ब्रिटिश सरकार बोल रही है कि यह वायरस तेजी से फैल रहा है। इससे मौत होने का खतरा बढ़ा नहीं है। इस चाबी में इतना बड़ा बदलाव भी नहीं हुआ है कि हमारी वैक्सीन इसपर काम न करे।'
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यह नया स्ट्रेन जहां भी फैलेगा, वहां क्या परिणाम देखने को मिल सकते हैं?
- डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर बताते हैं, 'यह नया स्ट्रेन वायरस का एक सीक्वेंस (अनुक्रम) है, जो बहुत तेजी से फैलता है। लेकिन जैसा कि अध्ययन में पता चला है कि इतनी जल्दी बीमार नहीं करता है, तो इसका मतलब ये है कि यह जहां भी फैलेगा, वहां संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। हालांकि गंभीर बीमारी होना या मृत्यु दर बढ़ना आदि नहीं होगा।'
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क्या कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन पर वैक्सीन प्रभावी नहीं होगी?
- डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर बताते हैं, 'ये सभी आरएनए वायरस हैं जो आम आदमी को सर्दी जुकाम देते हैं। ये भी बाकी वायरस की तरह म्यूटेट होते रहते हैं। इनकी तुलना अगर इंफ्लूएंजा वायरस से करें, तो कोरोना वायरस का म्यूटेशन बहुत धीरे होता है। दूसरी बात, दुनियाभर में तैयार वैक्सीन इनपर जरूर प्रभावी होंगी, क्योंकि चोर चोरी करने के बाद चाहे अपने बाल सफेद कर ले या दाढ़ी कटवा ले, लेकिन उसकी कद-काठी तो वैसी ही रहेगी। इसलिए पुलिस की पकड़ में वो आ ही जाएगा। ठीक वैसे ही, वायरस का मूल रूप वही है, इसलिए वैक्सीन इसपर काम करेगी।'
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कई वैक्सीन एक साथ आएंगी तो उनमें से कौन सी लें, यह कैसे तय करें?
- डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर कहते हैं, 'पहली बात, जो वैक्सीन आसानी से उपलब्ध हो। फाइजर की वैक्सीन माइनस 70 डिग्री सेल्सियस पर रखी जाती है, मॉडर्ना की वैक्सीन माइनस 20 डिग्री पर। इनके ट्रांसपोर्टेशन पर काफी खर्च आता है, अगर ये वैक्सीन लेते हैं तो उनकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हमारे देश में बन रही सभी वैक्सीन साधारण फ्रीजर में रखी जा सकती हैं। दूसरी बात, हमारे देश में जो कंपनी भारी मात्रा में उत्पादन करती है, वही आसानी से मिल पाएगी। तीसरा, आपको वैक्सीन के साइड-इफेक्ट (दुष्प्रभाव) मालूम होने चाहिए। उसके बाद तय करें कि कौन सी वैक्सीन लेनी है।'