दुनिया के कई देशों में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा मॉडर्ना की वैक्सीन को भी कई देशों ने मंजूरी दे दी है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। अब कोरोना वैक्सीन को लेकर चीन से भी एक खुशखबरी आ रही है। यहां की एक प्रमुख दवा कंपनी ने कहा कि उसकी कोरोना वैक्सीन जांच के अंतिम चरण के प्रारंभिक नतीजों के मुताबिक संक्रमण से बचाव में 79.34 फीसदी प्रभावी पाई गई है।
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चीन की इस दवा कंपनी का नाम 'सिनोफार्म' है। सरकार द्वारा संचालित 'सिनोफार्म' उन चार चीनी कंपनियों में शुमार है, जो कोरोना का टीका बनाने की वैश्विक दौड़ में शामिल हैं। कंपनी की इकाई 'बीजिंग बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स इंस्टिट्यूट लिमिटेड ने अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी दी है कि 'सिनोफार्म' ने अपनी वैक्सीन के तीसरे और अंतिम चरण के परीक्षण के बाद इसे मंजूरी देने के लिए आवेदन किया है।
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कंपनी के मुताबिक, यह वैक्सीन टीकाकरण के बाद सुरक्षा का एक अच्छा स्तर प्रदान करती है, जबकि यह डाटा विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन की वैक्सीन नियामक दोनों के प्रासंगिक तकनीकी मानकों को पूरा करता है। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि 50 फीसदी प्रभावी रहने पर भी किसी वैक्सीन को इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जा सकती है।
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हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिनोफार्म द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन चीन में करीब 10 लाख लोगों को दी जा चुकी है, लेकिन किसी में भी गंभीर साइड-इफेक्ट (दुष्प्रभाव) देखने को नहीं मिले हैं। कंपनी के चेयरमैन लिऊ जिंन्गजेन के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, पेरू और अर्जेंटीना समेत करीब 10 देशों में कंपनी इस वैक्सीन के ट्रायल कर रही है, जिसके तहत 60 हजार लोगों को टीका लगाया जा चुका है।
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कंपनी के चेयरमैन लिऊ जिंन्गजेन ने अगस्त महीने में ही वैक्सीन की कीमत को लेकर भी कहा था कि जब यह वैक्सीन बाजार में उतारी जाएगी तो इसकी दो खुराक की कीमत 1000 चीनी युआन यानी करीब 10 हजार रुपये से कम होगी। हालांकि उस समय इसको लेकर कई सवाल भी उठे थे कि आम आदमी के लिए यह कीमत काफी ज्यादा है, शायद कई लोग इसे न खरीद पाएं।