भारत में कोरोना की दो-दो वैक्सीन को एक साथ मंजूरी मिलने के बाद से यहां टीकाकरण का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, रविवार को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 'कोविशील्ड' और स्वदेशी वैक्सीन 'कोवैक्सीन' को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। 'कोविशील्ड' वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने विकसित किया है, जबकि इसका उत्पादन भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रही है और 'कोवैक्सीन' को भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बनाया है। अब इन दोनों वैक्सीन को तो मंजूरी मिल गई, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में अभी कोरोना की सात और वैक्सीन भी बन रही हैं? इनमें से कुछ वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं जबकि कुछ फिलहाल प्री-क्लीनिकल ट्रायल के स्तर पर हैं। आइए जानते हैं इन वैक्सीन के बारे में...
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Covid Vaccine: 'कोविशील्ड' और 'कोवैक्सीन' ही नहीं, भारत में बन रही हैं सात और वैक्सीन, जानिए ताजा अपडेट्स
Mon, 04 Jan 2021 02:27 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 04 Jan 2021 02:27 PM IST
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भारत में कोरोना वैक्सीन
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जायकोव-डी (ZyCoV-D)
- जायडस कैडिला की वैक्सीन डीएनए प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही है, जिसका नाम 'जायकोव-डी' है। कैडिला ने इसके लिए बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) विभाग के साथ सहयोग किया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल्स को शुरू करने के लिए मंजूरी दे दी है।
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स्पूतनिक-वी
- मानव एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही इस वैक्सीन को रूस के गमलेया रिसर्च सेंटर ने विकसित किया है। इसका उत्पादन हैदराबाद स्थित डॉक्टर रेड्डीज लैब कर रही है। फिलहाल इसके तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। हालांकि रूस में लोगों को यह वैक्सीन पहले से ही दी जा रही है। भारत की योजना इस साल 'स्पूतनिक-वी' की 30 करोड़ खुराक बनाने की है।
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नोवावैक्स (NVX-CoV2373)
- नोवावैक्स की यह वैक्सीन वायरस के प्रोटीन के टुकड़े को आधार बनाकर विकसित जा रही है, जिसका उत्पादन भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट कर रही है। फिलहाल इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल पर विचार किया जा रहा है।
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बायोलॉजिकल ई लिमिटेड की वैक्सीन
- यह प्रोटीन एंटीजेन आधारित वैक्सीन है, जिसे अमेरिकी की एमआईटी ने बनाया है और इसका उत्पादन हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई लिमिटेड कंपनी कर रही है। फिलहाल इस वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं।