भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चल रहा है। यहां अब तक एक करोड़ 48 लाख से भी अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि इनमें से दो लाख आठ हजार से ज्यादा टीके 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से ग्रसित 45 से 59 साल के लोगों को लगाए गए हैं। टीकाकरण अभियान के दूसरे चरण में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत कई नेता वैक्सीन की पहली खुराक ले चुके हैं और उन्होंने लोगों से बिना किसी झिझक के टीका लगवाने की अपील भी की है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं टीकाकरण से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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Coronavirus Vaccine: वो कौन-कौन से लोग हैं जो कोरोना वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं? विशेषज्ञ से जानें
Wed, 03 Mar 2021 03:47 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Wed, 03 Mar 2021 03:47 PM IST
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : Pixabay
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू हो चुका है, आप इसे कैसे देखते हैं?
- लखनऊ स्थित केजीएमयू के डॉ. प्रोफेसर सूर्यकांत कहते हैं, 'वैक्सीन के प्रति लोगों में कितना उत्साह है, आप समझ सकते हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे पहले वैक्सीन मैंने लगवाई, जिसके बाद नेशनल हेल्थ मिशन उत्तर प्रदेश ने मुझे टीकाकरण का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि 135 करोड़ जनसंख्या वाले देश के मुखिया ने खुद जाकर वैक्सीन लगवाई है। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बार नहीं बल्कि कई बार भारत की वैक्सीन की तारीफ की है। अब जब इसका दूसरा चरण चल रहा है, तो लोगों के मन से झिझक कम हुई है।'
कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
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कोई व्यक्ति किस तरह समझेगा कि उसे कोमोरबिडिटी है?
- डॉ. सूर्यकांत कहते हैं, 'कोई आम आदमी बुखार, पुरानी खांसी आदि जो आए और चली जाए, कोमोरबिडिटी में नहीं आती है। ऐसी बीमारी, जिसे गंभीर माना गया है, जिसके साथ लंबे समय तक रहना पड़ेगा, जैसे- कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज के मरीज आदि। इसके लिए 20 बीमारियों की सूची जारी की गई है। अगर कोई इसके अंतर्गत आते हैं तो एक फॉर्म भरना होगा। ये फॉर्म ऑनलाइन भी मौजूद है। इसे डाउनलोड करना होगा और जिस भी डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उनसे भरवाना होगा। लेकिन ध्यान रहे डॉक्टर रजिस्टर्ड होने चाहिए। इसे लेकर सेंटर पर जाना होगा। ये फॉर्म सरकारी अस्पताल में वैक्सीन लगवाने के लिए जरूरी है।'
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क्या आपको लगता है कि कोवैक्सिन को लेकर लोगों के मन में जो संदेह था, वो कम हो गया है?
- डॉ. सूर्यकांत कहते हैं, 'जी हां, सबसे ज्यादा उंगली इसी वैक्सीन पर उठाई जा रही थी। इसलिए जरूरी था कि लोगों के अंदर से इस संदेह को दूर किया जाए। लेकिन, कई बार संदेह बातों से नहीं बल्कि एक्शन से दिया जाता है। अब जब पीएम मोदी ने खुद पूरी तरह से भारत में बनी कोवैक्सीन लगवाई है, ऐसे में लोगों के अंदर अगर थोड़ा भी संदेह है, तो दूर हो गया होगा। यह भी गौर करने वाली बात है कि लोगों में इसके साइड इफेक्ट को लेकर भी संशय था, लेकिन सभी ने देखा पीएम ने वैक्सीन भी मुस्कुराते हुए लगवाई।'
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क्या टीकाकरण से पहले काउंसलिंग करनी पड़ती है?
- डॉ. सूर्यकांत कहते हैं, 'आम लोगों की ही नहीं बल्कि डॉक्टरों की भी काउंसलिंग करनी पड़ती है, लेकिन काउंसलिंग को दूसरे संदर्भ में न लें, मेरी खुद काउंसलिंग हुई है। जब मैं अस्पताल में 16 जनवरी को वैक्सीन लगवाने गया तो, डॉक्टर ने मुझे बताया कि ऐसे-ऐसे लगेगी, ये चेक होगा आदि। वैक्सीन लगने के बाद मुझे बैठाया गया और पूछा गया कि कोई परेशानी तो नहीं है। एक तरह से एकदम परफेक्ट इंतजाम किया गया है।'