डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
देशभर में कोरोना वायरस काफी संख्या में हर दिन लोगों को अपना शिकार बना रहा है। वहीं, दूसरी लहर आने के बाद ये वायरस हर दिन काफी लोगों की जान भी ले रहा है। लेकिन इन सबके बीच देश में म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसकी वजह से अब तक कई लोगों की मौत भी हो गई है। हालांकि, इस फंगस को रोकने के लिए कई स्तर पर काम चल रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुंह में ब्लैक फंगस को फैलने से रोकने के लिए हमें क्या सावधानी बरतनी चाहिए? शायद नहीं, तो चलिए इनके बारे में जानते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
क्यों है मौखिक स्वच्छता जरूरी?
- दरअसल, डॉक्टर्स के मुताबिक स्टेरॉयड और अन्य दवाओं के कारण जब व्यक्ति कोरोना से ठीक हो जाता है, तो इसके बाद मुंह में बैक्टीरिया या फंगस के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही ये साइनस, फेफड़ों और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए जो लोग कोरोना को मात देकर लौटे होते हैं, उन्हें मौखिक स्वच्छता का खासतौर पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, मौजूदा समय में कई ऐसे मरीज भी सामने आए हैं, जो पहले कोरोना से संक्रमित नहीं थे, लेकिन वो ब्लैक फंगस का शिकार हुए हैं। ऐसे में हमें अपना विशेषतौर पर ध्यान रखना चाहिए।
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क्या है मुंह के लक्षण?
-ओरल टिशूज का रंग बदलना
-मसूड़ों में सूजन आना
-आंखों में लालीपन आना
-बुखार आना
-नाक का बंद होना
-चेहरे में सूजन आना
-खांसी आना
-सांस में तकलीफ आदि।
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इन बातों का रखें खास ध्यान:-
-हमें दिन में दो से तीन बार ब्रश करना चाहिए, ताकि हमारा मुंह साफ रहे।
-आप गरारे कर सकते हैं और एंटी फंगल माउथ फ्रेशनर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
-आप कोरोना से ठीक होकर लौटे हैं, तो आपको किसी भी तरह के वायरल और फंगल इंफेक्शन से खुद का बचाव करने के लिए अपने मुंह की सफाई जरूर करनी है।
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-डॉक्टर्स ये भी मानते हैं कि जो लोग कोरोना को मात देकर आएं हैं, उन्हें अपना टूथब्रश बदल लेना चाहिए।
-इसके अलावा ब्रश और टंग क्लीनर को एंटीसेप्टिक माउथ वॉश से जरूर धोएं।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
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