कोरोना वायरस संक्रमण के मामले देश और दुनिया में बढ़ते ही जा रहे हैं। सामान्यत: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाला यह वायरस, संक्रमित सतहों या वस्तुओं के जरिए भी फैल रहा है। पानी में भी इस वायरस के मौजूद रहने की संभावना पर भी शोध हो चुके हैं। वहीं, हवा के जरिए भी इसका संक्रमण फैलने को लेकर शोध और अध्ययन हो चुके हैं। अब शोधकर्ताओं ने एक नए शोध अध्ययन के जरिए आगाह किया है कि खुली हवा में बिना मास्क के सांस लेने से संक्रमण का खतरा हो सकता है। अमेरिका में सीडीसी ने पिछले दिनों इस बारे में खुलासा किया है कि कोरोना वायरस हवा में करीब दो घंटे तक सक्रिय रह सकता है। हवा के जरिए इसका संक्रमण फैल सकता है।
CoronaVirus: हवा में इस तरह घुल रहा है कोरोना वायरस, बिना मास्क के सांस लेने से संक्रमण का खतरा
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हवा में कोरोना वायरस की मौजूदगी पर कई रिसर्च हो चुकी हैं, जबकि आगे भी शोध हो रहे हैं। इसी क्रम में यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने बताया कि कोरोना वायरस हवा में भी फैल रहा है। संक्रमित व्यक्ति के एयरोसोल के जरिए यह वायरस हवा में ऐसे घुल रहा है कि आप खुली हवा में बिना मास्क के सांस भी नहीं ले सकते। ऐसा करने से संक्रमण का खतरा बना रहता है।
इससे पहले भी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई शोध अध्ययनों में कहा है कि हवा से वायरस फैल सकता है। अब अमेरिकी शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसी 'सीडीसी' (CDC) ने हवा से कोरोना फैलने का दावा कर सावधान किया है। मंडे गाइडेंस में प्रकाशित रिपोर्ट में सीडीसी ने कहा है कि उनके पास इस बात के प्रमाण भी मौजूद हैं। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण छह फीट से ज्यादा की दूरी का ध्यान रखने वाले लोगों में भी फैल रहा है।
धुएं की तरह हवा में घुल रहा वायरस
- सीडीसी का कहना है, "वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना संक्रमित लोगों द्वारा एयरोसोल की मात्रा वायरस को फैलाने की पूरी क्षमता रखती है।" सीडीसी ने कहा है कि नंगी आंखों से नहीं देखी जा सकने वाली बहुत छोटी बूंदों के साथ वायरस हवा के माध्यम से फैल सकती है। ये एयरोसोल धुएं की तरह हवा में दो घंटों तक मौजूद रहता हैं। हवा की गुणवत्ता खराब होने की स्थिति में ये एयरोसोल आपके घर में भी प्रवेश कर सकते हैं।
सीडीसी का कहना है कि सीधे संपर्क में आने की तुलना में हवा के माध्यम से ट्रांसमिशन का खतरा कम रहता है। हालांकि मेडिकल जर्नल साइंस में प्रकाशित रिपोर्ट में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बताया है कि हवा में मौजूद एयरोसोल भी बढ़ते कोरोना संक्रमण का बड़ा कारण हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस वायरस के दो मीटर से अधिक दूरी तक फैलने की संभावना रहती है।