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Coronavirus: वैज्ञानिक ने प्रयोग के लिए खुद को दोबारा कर लिया संक्रमित, अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बात

Sun, 01 Nov 2020 04:24 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 01 Nov 2020 04:24 PM IST
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Coronavirus reinfection Scientist infects himself with Covid 19 twice to study antibodies and says results show that hopes of herd immunity are futile
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस के बारे में पहले के मुकाबले वैज्ञानिकों ने काफी कुछ जानकारी हासिल कर ली है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ ऐसा है, जिनके बारे में उन्हें जानने की जरूरत है। जैसे कि, एंटीबॉडीज कब तक शरीर में रहती है और दोबारा संक्रमण की क्या और कितनी संभावना है, हर्ड इम्यूनिटी कारगर होगी या नहीं? इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने के लिए एक वैज्ञानिक ने फिर से खुद को संक्रमित कर लिया। उस वैज्ञानिक का कहना है कि उन्होंने कोरोना के प्रति इम्यूनिटी को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने के लिए ऐसा किया। इस वैज्ञानिक का नाम प्रोफेसर अलेक्जेंडर शिपरनो है। वह फरवरी में फ्रांस की यात्रा पर गए थे, तभी पहली बार कोरोना से संक्रमित हुए थे। उसके बाद वो बिना अस्पताल गए कुछ ही दिनों में ठीक भी हो गए थे। 

Coronavirus reinfection Scientist infects himself with Covid 19 twice to study antibodies and says results show that hopes of herd immunity are futile
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना से ठीक होने के बाद 69 वर्षीय प्रोफेसर अलेक्जेंडर शिपरनो ने साइबेरिया के इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरीमेंटल मेडिसीन में कोरोना एंटीबॉडीज पर अध्ययन शुरू किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि संक्रमण के बाद तीसरे महीने के अंत तक एंटीबॉडीज का बिल्कुल भी पता नहीं चल सका। इसके बाद दोबारा संक्रमण की संभावना का विस्तृत अध्ययन करने के लिए वो बिना मास्क के संक्रमितों के साथ रहे। इस दौरान वो दोबारा संक्रमित हो गए। 

Coronavirus reinfection Scientist infects himself with Covid 19 twice to study antibodies and says results show that hopes of herd immunity are futile
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

प्रोफेसर अलेक्जेंडर शिपरनो ने बताया कि दूसरी बार कोरोना से संक्रमित होने के बाद उन्होंने पहले लक्षण के तौर पर गले में खराश का अनुभव किया। हालांकि उनका ये दूसरा संक्रमण पहले के मुकाबले ज्यादा गंभीर था और इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उन्होंने बताया कि पांच दिनों तक तो उनके शरीर का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। साथ ही उनके सूंघने की शक्ति चली गई और स्वाद में भी बदलाव आ गया। 

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Coronavirus reinfection Scientist infects himself with Covid 19 twice to study antibodies and says results show that hopes of herd immunity are futile
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

प्रोफेसर अलेक्जेंडर शिपरनो ने बताया कि छठे दिन उनके फेफड़ों का सीटी स्कैन किया गया, जो कि बिल्कुल साफ था, लेकिन उसके तीन दिन बाद जब एक्स-रे किया गया तो दोहरे न्यूमोनिया का पता चला। हालांकि, वायरस संक्रमण के दो सप्ताह के भीतर चला गया था और कोरोना वायरस के लिए परीक्षण किए गए नमूनों में इसका पता नहीं चला। 

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Coronavirus reinfection Scientist infects himself with Covid 19 twice to study antibodies and says results show that hopes of herd immunity are futile
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

प्रोफेसर अलेक्जेंडर शिपरनो ने अध्ययन के बाद ये नतीजा निकाला कि हर्ड इम्यूनिटी से कोरोना को हराने की उम्मीद बेकार है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वायरस कई सालों तक हमारे साथ रहेगा और जहां तक वैक्सीन की बात है तो कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन के कई डोज इस्तेमाल करने होंगे।  

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