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Coronavirus: क्या दिल्ली में आ चुकी है कोरोना वायरस की 'तीसरी लहर'?

Sun, 01 Nov 2020 03:03 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 01 Nov 2020 03:03 PM IST
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Coronavirus Has the third wave of Covid 19 arrived in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दिल्ली सरकार के इस इनकार के बावजूद कि कोविड-19 की 'तीसरी लहर' देश की राजधानी में नहीं आई है, पिछले दिनों संक्रमण के मामले अब तक सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं। बुधवार को जहां 5673 मामले दर्ज किए गए, वहीं गुरुवार को ये आंकड़ा 5729 पर पहुंचा गया। शुक्रवार को 5891 नए मामले सामने आए। ये अब तक दिल्ली में किसी एक दिन दर्ज किए गए कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों में सबसे ज्यादा है। दिल्ली में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी 6423 तक पहुंच गई है। 



महामारी के बीच एक अस्पताल हुआ कम 

बढ़ते हुए मामलों के साथ ही दिल्ली में संक्रमण का 'पॉजिटिविटी रेट' भी 9.55 हो गया है जबकि देश की राजधानी में अब तक संक्रमित होने वालों की संख्या 3.75 लाख पहुंच चुकी है। इसी बीच चिकित्सा की सुविधाओं की अगर बात की जाए तो कोविड-19 के उपचार के लिए चिह्नित किए गए अस्पतालों में अब एक अस्पताल कम हो गया है जबकि मामले प्रतिदिन के हिसाब से बहुत ज्यादा बढ़ रहे हैं। ये अस्पताल है हिंदू राव अस्पताल, जहां पर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की लंबी हड़ताल चली। उत्तरी दिल्ली में कोविड-19 के मरीजों का इलाज इसी अस्पताल में होता था। यहां पहले से भर्ती कोविड-19 के मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में भेज दिया गया। 

Coronavirus Has the third wave of Covid 19 arrived in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

बढ़ते मामलों पर क्या है सरकार का पक्ष

पत्रकारों से बात करते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन का कहना है कि संक्रमित लोगों की संख्या इसलिए ज्यादा दिख रही है क्योंकि दिल्ली में पहले से भी ज्यादा टेस्टिंग हो रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार ने संक्रमित लोगों के परिवार के लोगों और उनसे संपर्क में आए लोगों को ढूंढ कर इलाज करने के काम में भी तेजी लाई है। लेकिन, कपिल चोपड़ा, जो गरीबों के लिए निजी अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा की संस्था 'चैरिटी बेड्स' चलाते हैं, उनका कहना है, 'दिल्ली को बढ़ते हुए संक्रमण के मामलों से निपटने के लिए मदद की जरूरत है। स्थिति को काबू में लाने के लिए सरकार को चाहिए कि वो कुछ पाबंदियां लागू करे जिससे जगह-जगह भीड़ न लगे और लोग ज्यादा मेलजोल से दूर रहें। गंभीर बात ये है कि सारे अस्पताल संक्रमित मरीजों से भरे हुए हैं और अस्पतालों में नए मरीजों के लिए जगह नहीं है।' 

Coronavirus Has the third wave of Covid 19 arrived in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

जिन राज्यों में संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, उनमें दिल्ली के अलावा पश्चिम बंगाल और केरल शामिल हैं। अपने बयान में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि पिछले दस महीनों में कोरोना के खिलाफ युद्ध में मास्क और दो गज की दूरी 'रामबाण' साबित हुए हैं। उनका कहना था कि संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए 'कोविड अनुरूप व्यवहार' को 'जन आंदोलन' की तरह चलाया जाना चाहिए। 

लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के डॉक्टर विजय के अनुसार, देखा जाए तो अभी भी कोविड-19 का सही से प्रबंधन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि जो संक्रमण से बचाव के तरीकों की बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री कर रहे हैं, वो लागू होते नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि गृह मंत्रालय अपनी 'गाइडलाइन्स' जारी करता रहता है, वहीं चुनाव आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय भी अपनी गाइडलाइन्स जारी करते हैं।

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Coronavirus Has the third wave of Covid 19 arrived in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

देश के सबसे बड़े अस्पताल में भी बेड की कमी?

इलाज कराने के लिए गए लोगों का कहना है कि एम्स में भी 'बेड' की काफी कमी है जबकि कोविड-19 के लिए अलग इंतजाम किया गया है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल के आपातकाल वाले वॉर्ड में भी तीन-तीन घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, गंभीर सिर की चोटों या दूसरी गंभीर दुर्घटनाओं के मरीजों को भर्ती करने की बजाय एम्स से दूसरे अस्पतालों में 'रेफर' किया जा रहा है। 

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Coronavirus Has the third wave of Covid 19 arrived in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

वर्धमान महावीर अस्पताल मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में 'कम्युनिटी मेडिसिन' के विभागाध्यक्ष और निदेशक डॉक्टर जुगल किशोर ने कहा कि उनके अस्पताल की जो 'सुपर स्पेशलिटी' वाली 'बिल्डिंग' थी, जिसमें हृदय रोग से लेकर दूसरे गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों को भर्ती किया जाता था, वो अब पूरी तरह से कोविड-19 के मरीजों के लिए अलग कर दी गई है। जुगल किशोर कहते हैं कि उनका अस्पताल ही है जो कोविड-19 के मरीजों के साथ-साथ उन गंभीर चोटों या बीमारियों वाले मरीजों को भी देख रहा है जिन्हें दूसरे अस्पताल लेने से मना कर रहे हैं। वो कहते हैं, 'फिर भी स्थिति ऐसी है कि जो कोविड-19 के संक्रमण वाले मरीज नहीं भी हैं उन्हें हम भर्ती नहीं कर पा रहे हैं और उनका इलाज 'ओपीडी' में ही हो रहा है।' 

कोविड-19 के मरीजों के इलाज में लगे डॉक्टरों का आरोप है कि अब भी अस्पतालों में ऑक्सीजन वाले 'बेड' की कमी है। जहां तक बात एम्स की होती है तो मरीजों के परिजनों का आरोप है कि इस अस्पताल में प्राथमिकता मंत्रियों, सांसदों या अधिकारियों को दी जाती है जबकि आम कोविड-19 के संक्रमण वाले मरीजों को मशक्कत करनी पड़ती है। 

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