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Coronavirus: कोरोना महामारी के दौरान महिलाओं की खुशी में आई कमी, शोध में दावा

Wed, 10 Mar 2021 01:19 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 10 Mar 2021 01:19 PM IST
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Coronavirus new study Women reported decreased happiness during Covid 19 pandemic
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

कोरोना महामारी ने पिछले एक साल से दुनियाभर के लोगों को परेशान करके रखा हुआ है। महामारी के इस दौर में खासकर महिलाओं को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा है। एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान महिलाओं, विशेष रूप से माताओं, ने पुरुषों की तुलना में चाइल्ड केयर और घर के काम जैसे कार्यों पर अधिक समय बिताया। बदले में, घर के कामों को पूरा करने में लगने वाला समय निचले कल्याण से जुड़ा हुआ था और महामारी के दौरान उनकी खुशी में कमी आई है। इस अध्ययन को प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 

Coronavirus new study Women reported decreased happiness during Covid 19 pandemic
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग की उप कार्यकारी निदेशक अनिता भाटिया ने हाल ही में कहा था कि महामारी की वजह से पुरुषों की तुलना में महिलाओं की समस्याएं काफी हद तक बढ़ गई हैं। बच्चों और परिवार की देखभाल को लेकर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं और इस वजह से उनका कार्यस्थल यानी नौकरी पर फिर से लौटना नामुमकिन सा हो गया है। 

Coronavirus new study Women reported decreased happiness during Covid 19 pandemic
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

अनिता भाटिया का कहना था कि महामारी के इस दौर में महिलाओं की जिम्मेदारियां तीन से चार गुना ज्यादा बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, महामारी से पहले भी पुरुषों की तुलना में महिलाएं बिना वेतन के घर के कामों में अधिक समय बिता रही थीं, लेकिन अब उनका यह काम और भी बढ़ गया है। 

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Coronavirus new study Women reported decreased happiness during Covid 19 pandemic
कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay

अनिता भाटिया के मुताबिक, पिछले एक साल में यानी महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं, जिसमें महिलाओं भी शामिल हैं। अब जब चूंकि लोगों को एक बार फिर नौकरियों पर रखा जा रहा है, ताकि अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके, लेकिन जिस संख्या में महिलाओं को नौकरी से निकाला गया था, उतनी तादाद में उन्हें नौकरी पर रखा नहीं जा रहा है। यह काफी चिंता का विषय है। उन्होंने दुनियाभर के देशों को आगाह किया है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो जाहिर है उत्पादकता में कमी आएगी। ऐसे में सरकारों और कंपनियों को अपना नजरिया बदलना होगा और कंपनियों को महिलाओं के बारे में सोचना होगा और उन्हें वैसा काम देना होगा, जिससे वो दफ्तर का काम भी कर सकें और परिवार और बच्चों की भी देखभाल कर सकें। 

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