ब्रिटेन और कनाडा में तो कोरोना की वैक्सीन के लिए लोगों का इंतजार खत्म हो गया है और माना जा रहा है कि भारत में भी जल्द ही वैक्सीन आ जाएगी, लेकिन पिछले कई दिनों से लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर वैक्सीन कितनी असरदार होगी। अगर आपको वैक्सीन लग गई है तो आपके शरीर पर उसका कितना असर होगा, यह बता पाना अभी मुश्किल है। लेकिन प्रतिष्ठित नेचर पत्रिका में छपे एक शोध में वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि अब खून की जांच से पता किया जा सकेगा कि जो वैक्सीन आपको लगी है, वह कितनी असरदार है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल, हॉर्वर्ड और एमआईटी संस्थान के वैज्ञानिकों ने मिलकर बंदरों पर एक शोध किया। इसमें सबसे पहले बंदरों को कोरोना की प्रायोगिक वैक्सीन दी गई और उसके कुछ दिनों बाद खून संबंधी एक विशेष प्रकार की जांच की गई। असल में इस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कोरोना वायरस के हमले से निपटने के लिए बंदरों का प्रतिरक्षा तंत्र कितना तैयार हुआ है। इसके नतीजे उत्साहजनक निकले।
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अब शोधकर्ताओं का कहना है कि बंदरों की तरह इंसानों में भी कोरोना की वैक्सीन देने के बाद विकसित हुए प्रतिरक्षा तंत्र का पता लगाया जा सकता है। बंदरों पर किए गए ट्रायल के नतीजों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक इंसानों के लिए विशेष रक्त जांच विकसित करने में जुट गए हैं।
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शोधकर्ताओं की टीम में शामिल बोस्टन विश्वविद्यालय के वैक्सीन विशेषज्ञ डॉ. डैन बरौच का कहना है कि यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी सफलता है, क्योंकि इससे कोरोना वैक्सीन की प्रभावकारिता का पता लगाया जा सकता है।
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माना जा रहा है कि वैज्ञानिक अगर वैक्सीन का असर बताने वाला यह ब्लड टेस्ट विकसित कर लेते हैं तो वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिकों की लंबे समय तक क्लीनिकल ट्रायल करने की जरूरत खत्म हो जाएगी। अमेरिका के जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फाउची कहते हैं कि अगर वैज्ञानिक यह 'खून जांच' विकसित कर लेते हैं तो फ्लू की तरह वैक्सीन तैयार करने की पद्धति अपना सकते हैं। दरअसल, फ्लू की वैक्सीन को तैयार करने के लिए नए सिरे से क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि पिछले नतीजों के आधार पर आगे की वैक्सीन तैयार की जाती है।