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Coronavirus: कोरोना से बचाव के लिए इस नियम का पालन है सबसे जरूरी, नए शोध में खुलासा

Tue, 01 Dec 2020 02:49 PM IST
भाषा Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 01 Dec 2020 02:49 PM IST
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Coronavirus new study coronavirus precautions IIT Bhubaneswar study confirms social distancing norms effectiveness of face mask
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनने और सामाजिक दूरी अपनाने को सबसे प्रभावशाली तरीकों में से एक माना गया है। अब इसी से संबंधित एक अध्ययन में पाया गया है कि मास्क जैसे एहतियात के बिना छींक के दौरान निकली पानी की छोटी-छोटी बूंदें 25 फुट की दूरी तक जा सकती हैं, यहां तक कि बेहद सूक्ष्म कण मास्क से भी बाहर निकल सकते हैं। यह अध्ययन आईआईटी भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं ने किया है। अध्ययन में कहा गया है कि मास्क और फेस-शील्ड जैसे उपकरण प्रभावी तरीके से ऐसे लीकेज को कम करते हैं और छींक के प्रभाव को एक से तीन फुट के बीच सीमित कर सकते हैं। उसमें कहा गया है, हालांकि ये भी बेहद सूक्ष्म कणों के लीकेज को नहीं रोक सकते। इसलिए दो गज की दूरी के नियम का पालन महत्वपूर्ण है। 

Coronavirus new study coronavirus precautions IIT Bhubaneswar study confirms social distancing norms effectiveness of face mask
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आईआईटी भुवनेश्वर द्वारा जारी बयान के अनुसार, अध्ययन में कहा गया है कि मास्क और फेस-शील्ड लगाने के बावजूद छींकने के वक्त नाक को हाथ यह कोहनी से ढंकें ताकि अति सूक्ष्म बूंदें लीक होने से बचें। यह रेखांकित करते हुए कि वायरस को फैलने से रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है, अध्ययन में छींक के दौरान मानक और गैर-मानक मास्कों के प्रभाव को परखा गया है। 

Coronavirus new study coronavirus precautions IIT Bhubaneswar study confirms social distancing norms effectiveness of face mask
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

स्कूल ऑफ मकैनिकल साइंस के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर वेणुगोपाल अरुमुरु और उनकी टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन से इसकी पुष्टि होती है कि एहतियाती उपकरणों जैसे मास्क आदि के बगैर छींक के दौरान निकली छोटी-छोटी बूंदें सामान्य वातावरण में 25 फुट की दूरी तक जा सकती हैं। अध्ययन संक्रमण से बचने के लिए सभी ओर से छह फुट की दूरी बनाए रखने की सलाह देता है और इसके प्रभाव की पुष्टि करता है। 

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Coronavirus new study coronavirus precautions IIT Bhubaneswar study confirms social distancing norms effectiveness of face mask
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रोफेसर आर. वी. राजा कुमार ने कहा कि संस्था के संकाय सदस्य और छात्र कोविड-19 महामारी के दौरान अथक परिश्रम कर रहे हैं और नई तकनीक विकसित करने के अलावा संबंधित मुद्दों पर अध्ययन भी कर रहे हैं। वर्तमान सामाजिक सरोकार के मुद्दे पर अध्ययन करने के लिए टीम को बधाई देते हुए प्रोफेसर कुमार ने कहा कि यह अध्ययन भी इसी दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने कहा, 'जैसा कि सभी जानते हैं, कोविड-19 छींकने, खांसने और बोलने के दौरान मुंह और नाक से निकलने वाली पानी की सूक्ष्म बूंदों के कारण फैलता है। यह अध्ययन दिखाता है कि कैसे एहतियाती उपकरणों से ये सूक्ष्म कण लीक हो सकते हैं। इस अध्ययन में दो गज की दूरी का महत्व स्पष्ट है।' 

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Coronavirus new study coronavirus precautions IIT Bhubaneswar study confirms social distancing norms effectiveness of face mask
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

यह अध्ययन के निष्कर्ष से ना सिर्फ लोगों में जागरुकता आएगी बल्कि अनुसंधानकर्ता मास्क के नए डिजाइनों के बारे में भी सोचेंगे। कुमार ने कहा, 'मैं दोहराना चाहूंगा कि आईआईटी-भुवनेश्वर के अनुसंधानकर्ता कोविड-19 से जुड़े अध्ययन जारी रखेंगे और इस महामारी के लड़ने के लिए विकास कार्य करेंगे।' विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि इस अध्ययन को अमेरिकन फिजिक्स सोसायटी ने 'फिजिक्स ऑफ फ्यूइड' पत्रिका में 'फीचर्ड आर्टिकल' के रूप में चुना है। 

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