Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकोरमाइकोसिस एक गंभीर बीमारी बनकर उभरा है, जो देश के लिए एक नई चिंता का कारण बन गया है। इसके मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक हजारों लोग इसके शिकार हो चुके हैं और कईयों ने तो अपनी जान भी गंवा दी है। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे डरने की नहीं बंल्कि इसके प्रति जागरूक होने की जरूरत है, तभी इस संक्रमण को रोका जा सकेगा। वैसे तो विशेषज्ञ ब्लैक फंगस संक्रमण के फैलने की कई वजह बताते हैं, लेकिन इस बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर कोरोना के इलाज में वो कौन सी गलती है, जो ब्लैक फंगस को जन्म दे रही है? आइए जानते हैं इसके बारे में...
सावधान: कहीं कोरोना के इलाज में ये गलती तो नहीं बन रही ब्लैक फंगस की वजह? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ
विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस कोई नई बीमारी नहीं है बल्कि इसके मामले पहले भी आते थे, लेकिन बहुत ही कम। दरअसल, पहले गंदे पानी से नाक की सफाई करने से ब्लैक फंगस से संक्रमण के मामले सामने आते थे।
कोरोना से संक्रमित या फिर ठीक हो चुके मरीजों के लिए ब्लैक फंगस संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है। इससे संक्रमित होने के बाद या तो मरीजों की आंखें निकालनी पड़ रही हैं या फिर अगर संक्रमण अधिक फैल गया है तो मरीज की जान भी जा सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लैक फंगस मिट्टी, हवा, भोजन आदि में हो सकता है। इससे संक्रमित होने का खतरा उनको ज्यादा होता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिनका शुगर लेवल अनियंत्रित रहता है या फिर कोरोना के इलाज के दौरान जिन्हें अंधाधुंध स्टेरॉयड दिया गया है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि जो लोग आईसीयू में लंबे समय तक रहते हैं, उनमें ब्लैक फंगस संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि हाल के दिनों में देश में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी गई है, ऐसे में औद्योगिक ऑक्सीजन ने कई मरीजों की जान बचाई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक ऑक्सीजन के साथ मरीजों की नाक में पहुंच रहा प्रदूषण ब्लैक फंगस की वजह भी बन रहा है।