देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को काबू करने के लिए सरकार टीकाकरण पर काफी जोर दे रही है। एक आंकड़े के अनुसार देश में अब तक करीब 19.50 करोड़ लोगों को या तो कोविशील्ड या कोवैक्सीन का डोज लगाया जा चुका है, उनमें से 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को दूसरी डोज भी मिल चुकी है। हालांकि वैक्सीनेशन को लेकर अब भी लोगों को मन में कई तरह के सवाल और भ्रम हैं, हमारी कोशिश रहती है कि हम आपके मन में मौजूद सभी तरह के भ्रम को दूर कर सकें।
फैक्ट चेक: क्या निमोनिया की वैक्सीन भी देती है कोरोना से सुरक्षा, जानिए वायरल पोस्ट की सच्चाई?
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों को निमोनिया की वैक्सीन लग चुकी है वह खुद को कोरोना से सुरक्षित मान सकते हैं। ऐसे लोगों को दोबारा से कोविड वैक्सीन लगवाने की कोई जरूरत नहीं है। निमोनिया की वैक्सीन ही कोरोना से सुरक्षा देने के लिए काफी है।
भारत सरकार ने माइ गवर्नमेंट इंडिया ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट के माध्यम से इस दावे का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि यह दावा फर्ज़ी है। सरकार द्वारा बताया गया है कि निमोनिया की वैक्सीन विशेष प्रकार के वायरस के खिलाफ सुरक्षा के लिए दी जाती है। कोविड संक्रमण को रोकने या कोविड के कारण होने वाली दिक्कतों से बचाने में इस वैक्सीन की कोई भूमिका नहीं है। कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को कोविड वैक्सीन ही लगवानी चाहिए।
Don’t believe in any rumours related to #COVID19 and vaccination. Stay informed, stay safe!
— MyGovIndia (@mygovindia) May 20, 2021
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क्या कोविड वैक्सीन लेने के बाद कोई दिक्कत हो सकती है?
उजाला सिग्नस सोनीपत के क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. जितेंद्र नासा कहते हैं कि वैक्सीन लेना पूरी तरह से सुरक्षित है, इससे आपको बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोगों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं जोकि सामान्य हैं। शरीर में किसी भी तरह के एंटीजन जाने पर इस तरह की प्रतिक्रिया होना सामान्य है। सभी लोगों को टीका लगवाना चाहिए।
एम्स में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अजीत सिंह ओबेरॉय बताते हैं कि भारत में प्रयोग में लाई जा रही तीन वैक्सीन- कोवैक्सीन,कोविशील्ड और स्पुतनिक काफी सुरक्षित हैं। क्लीनिकल रिसर्च में इनसे होने वाले साइड इफेक्ट्स भी बहुत कम ही देखे गए हैं। लोगों के मन में इसको लेकर डर इसलिए भी है क्योंकि लोग प्रमाणिक स्रोतों से ज्यादा सोशल मीडिया से वैक्सीन के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
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नोट: यह लेख केंद्र सरकार के माइ गवर्नमेंट इंडिया ट्विटर हैंडल से किए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है।
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