कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसके इलाज और वैक्सीन को लेकर दुनियाभर में शोध हो रहे हैं। इस कोरोना महामारी काल में आवश्यकताएं ही आविष्कार का सृजन कर रही हैं। इसी कड़ी में ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड स्कैनर बनाया है, जिससे कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी। यह पोर्टेबल स्कैनर कोरोना संक्रमण के कारण मरीजों के फेफड़ों को पहुंचे नुकसान के बारे में बताएगा। पोर्टेबल होने के कारण इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। यह स्कैनर एआई तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर कार्य करता है।
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कोरोना वायरस से मरीजों के फेफड़े को कितना नुकसान, तुरंत बताएगा ये पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड स्कैनर
Sat, 30 May 2020 10:08 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 30 May 2020 10:08 AM IST
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पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड स्कैनर
- फोटो : British Columbia University
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pexels
कम समय में जांच
- यूनिवर्सिटी की वेबसाइट(news.ubc.ca) के मुताबिक, पोर्टेबल स्कैनर को तैयार करने वाले अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा है कि यह लैब में होने वाले जांच की तुलना में कम समय में तेजी से नतीजे बताता है। यह पोर्टेबल स्कैनर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे फेफड़ों की तस्वीरों वाली ऑनलाइन लाइब्रेरी से जोड़ दिया गया है।
पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड स्कैनर
- फोटो : UBC
सटीक नतीजों का दावा
- कोरोना संक्रमित मरीजों पर स्कैनर को लगाने पर यह तुरंत बता देता है कि कोरोना वायरस ने फेफड़ों को किस हद तक नुकसान पहुंचाया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्कैनर यह भी बताता है कि फेफड़े कितनी तेजी से खराब हो रहे हैं। शोधकर्ता इसके नतीजों के सटीक होने का दावा करते हैं।
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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
इस्तेमाल करना आसान
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड स्कैनर का इस्तेमाल करना काफी आसान है। जरूरी नहीं कि इसे विशेषज्ञ ही इस्तेमाल करें, कम अनुभव वाले डॉक्टर भी इसकी मदद से सटीक नतीजे बता सकते हैं। बताया जा रहा है कि शोधकर्ताओं की टीम जल्द ही फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से संबंधित कनाडा की पहली अल्ट्रासाउंड लाइब्रेरी तैयार करेगी।
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कोरोना वायरस
- फोटो : Pixabay
टीम में कई विशेषज्ञ शामिल
- ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ डॉ. टेरेसा सैंग के अलावा इसे तैयार करने वाली टीम में सैंट पॉल्स हॉस्पिटल के इमरजेंसी फिजिशियन डॉ. ओरॉन फ्रेंकेल, वैंकूवर जनरल हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पुरैंग एबॉलमैसुमी और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रॉबर्ट रोलिंग शामिल हैं।