डेंगू की बीमारी को सेहत के लिए बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता रहा है, इससे हर साल लाखों लोगों को मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, वैसे तो डेंगू के लक्षण हल्के होते हैं और सामान्य दवाओं से ठीक हो जाते हैं, हालांकि कुछ लोगों में इस बीमारी के कारण खतरा बढ़ जाता है। डेंगू में ब्लीडिंग जैसी स्थितियों को गंभीर माना जाता है और इसके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
सेहत की बात: डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स ही नहीं हेमाटोक्रिट भी बढ़ा सकता है खतरा, जानिए इसके जोखिम
डेंगू में हेमाटोक्रिट का बढ़ना शरीर में पानी की कमी या रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा निकलने का संकेत हो सकता है। लगातार बढ़ती रीडिंग, लो ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। प्लेटलेट्स के साथ पूरी क्लिनिकल स्थिति देखकर ही डॉक्टर उपचार तय करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, आमतौर पर डेंगू का खतरनाक दौर तब शुरू होता है जब आपका बुखार उतरने लगता है। वैसे तो हेमाटोक्रिट बढ़ने का मतलब हर बार डेंगू की गंभीरता नहीं है। कई बार शरीर में पानी की कमी और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियां भी इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
पहले जान लीजिए हेमाटोक्रिट क्या है और डेंगू में क्यों बढ़ता है?
हेमाटोक्रिट, खून में लाल रक्त कोशिकाओं के अनुपात को दर्शाता है। डेंगू के गंभीर मामलों में रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा लीक होने लग जाता है। इससे रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं का अनुपात बढ़ जाता है और एचसीटी की रीडिंग ऊपर जा सकती है। इस प्रक्रिया को प्लाज्मा लीकेज कहा जाता है।
प्लेटलेट्स और हेमाटोक्रिट में क्या अंतर है?
प्लेटलेट्स खून का थक्का बनाने में मदद करते हैं, जबकि हेमाटोक्रिट लाल रक्त कोशिकाओं के अनुपात को दर्शाता है। डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। यदि हेमाटोक्रिट बढ़ रहा हो और मरीज की हालत बिगड़ रही हो, तो डॉक्टर प्लाज्मा लीकेज और रक्त संचार से जुड़ी समस्याओं के बारे में ध्यान देते हैं।
इन लक्षणों पर भी देते रहें ध्यान
अगर डेंगू के दौरान पेट में लगातार तेज दर्द, बार-बार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आने या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। पेशाब कम होने, हाथ-पैर ठंडे पड़ने और चक्कर के साथ कमजोरी भी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं।
- डेंगू के मामलों में बुखार उतरने का मतलब यह नहीं होता कि मरीज ठीक हो रहा है। डेंगू में गंभीर लक्षण अक्सर बुखार कम होने के आसपास या उसके बाद सामने आते हैं।
डेंगू में कौन-सी सावधानियां जरूरी हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू की बीमारी वैसे तो सभी लोगों में गंभीर नहीं होती है, हालांकि इसके लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लें और पेशाब की मात्रा पर ध्यान रखें। पेशाब कम होना शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है।
- डेंगू में उल्टी की दिक्कत भी बढ़ जाती है। उल्टी और बार-बार दस्त जैसे दिक्कतें हो रही हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं।
- बुखार के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
- एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।