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जरूरी बात: चश्मे का फ्रेम और लेंस चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान वरना आंखों को हो सकता है नुकसान
Fri, 30 Oct 2026 02:35 PM IST
श्रुति गौड़
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Fri, 30 Oct 2026 02:35 PM IST
सार
Important Tips to Choose the Right Glasses: अगर आप भी नया चश्मा खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस लेख में जानें चश्मा खरीदते समय किन 7 जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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चश्मे का फ्रेम और लेंस चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
Important Tips to Choose the Right Glasses: आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच आंखों की देखभाल करना बेहद जरूरी हो गया है। कई लोगों को नजर कमजोर होने या आंखों से जुड़ी दूसरी समस्याओं के कारण चश्मा पहनना पड़ता है। वहीं, कुछ लोग धूप और धूल से बचाव के लिए भी चश्मा खरीदते हैं। लेकिन बाजार में कई तरह के फ्रेम, लेंस और डिजाइन उपलब्ध होने की वजह से सही चश्मा चुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
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चश्मे का फ्रेम और लेंस चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
चश्मा खरीदते समय इन 7 बातों का रखें ध्यान
1. सबसे पहले आंखों की जांच कराएं
चश्मा खरीदने से पहले आंखों की जांच कराना सबसे जरूरी है। बिना आंखों की जांच के अपनी मर्जी से चश्मे का नंबर न चुनें। ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई स्पेशलिस्ट से आंखों की जांच करवाएं और उसी के अनुसार लेंस बनवाएं।
2. लेंस की क्वालिटी पर दें ध्यान
चश्मा खरीदते समय सिर्फ फ्रेम ही नहीं, बल्कि लेंस की क्वालिटी भी देखनी चाहिए। बाजार में अलग-अलग प्रकार के लेंस मिलते हैं, जैसे:
अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से लेंस चुनें।
1. सबसे पहले आंखों की जांच कराएं
चश्मा खरीदने से पहले आंखों की जांच कराना सबसे जरूरी है। बिना आंखों की जांच के अपनी मर्जी से चश्मे का नंबर न चुनें। ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई स्पेशलिस्ट से आंखों की जांच करवाएं और उसी के अनुसार लेंस बनवाएं।
2. लेंस की क्वालिटी पर दें ध्यान
चश्मा खरीदते समय सिर्फ फ्रेम ही नहीं, बल्कि लेंस की क्वालिटी भी देखनी चाहिए। बाजार में अलग-अलग प्रकार के लेंस मिलते हैं, जैसे:
- पॉलीकार्बोनेट लेंस: हल्के और अपेक्षाकृत मजबूत होते हैं।
- हाई इंडेक्स लेंस: ज्यादा पावर वाले चश्मों को पतला और हल्का बनाने में मदद करते हैं।
- फोटोक्रोमिक लेंस: धूप में गहरे और घर के अंदर हल्के हो जाते हैं।
- एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग: लेंस पर पड़ने वाली चमक और रिफ्लेक्शन कम करने में मदद करती है।
अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से लेंस चुनें।
चश्मे का फ्रेम और लेंस चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
3. चेहरे के हिसाब से चुनें फ्रेम
चश्मे का फ्रेम आपके चेहरे पर सही फिट होना चाहिए। बहुत ज्यादा टाइट या ढीला फ्रेम पहनने से परेशानी हो सकती है।
फ्रेम खरीदने से पहले उसे पहनकर जरूर देखें।
4. चश्मे का वजन और फिटिंग चेक करें
चश्मा ऐसा होना चाहिए जिसे आप लंबे समय तक आराम से पहन सकें। भारी फ्रेम नाक और कानों पर दबाव डाल सकता है। इसलिए हल्के और आरामदायक मटेरियल वाला फ्रेम चुनें। यह भी देखें कि चश्मा नाक से बार-बार नीचे न खिसके और कानों के पीछे दर्द न करे।
चश्मे का फ्रेम आपके चेहरे पर सही फिट होना चाहिए। बहुत ज्यादा टाइट या ढीला फ्रेम पहनने से परेशानी हो सकती है।
- गोल चेहरे पर चौकोर या आयताकार फ्रेम अच्छा लग सकता है।
- चौकोर चेहरे पर गोल या ओवल फ्रेम चुन सकते हैं।
- ओवल चेहरे पर कई तरह के फ्रेम अच्छे लगते हैं।
- हार्ट शेप चेहरे पर हल्के और संतुलित फ्रेम चुन सकते हैं।
फ्रेम खरीदने से पहले उसे पहनकर जरूर देखें।
4. चश्मे का वजन और फिटिंग चेक करें
चश्मा ऐसा होना चाहिए जिसे आप लंबे समय तक आराम से पहन सकें। भारी फ्रेम नाक और कानों पर दबाव डाल सकता है। इसलिए हल्के और आरामदायक मटेरियल वाला फ्रेम चुनें। यह भी देखें कि चश्मा नाक से बार-बार नीचे न खिसके और कानों के पीछे दर्द न करे।
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चश्मे का फ्रेम और लेंस चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
5. UV प्रोटेक्शन का रखें ध्यान
अगर आप धूप में पहनने के लिए चश्मा खरीद रहे हैं, तो उसमें UV400 या 100% UVA और UVB प्रोटेक्शन की जानकारी जरूर चेक करें। यह आंखों को सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने में मदद करता है। ध्यान रखें कि सिर्फ गहरे रंग के लेंस का मतलब UV प्रोटेक्शन होना नहीं है।
6. एंटी-ग्लेयर और ब्लू लाइट फिल्टर को समझें
अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करते हैं, तो एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग आपके लिए उपयोगी हो सकती है। इससे लेंस पर पड़ने वाली चमक कम होती है।
वहीं, ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मों को लेकर यह समझना जरूरी है कि इनके जरिए डिजिटल स्क्रीन से होने वाली आंखों की थकान या नुकसान को रोकने के ठोस प्रमाण सीमित हैं। स्क्रीन इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना ज्यादा उपयोगी है।
अगर आप धूप में पहनने के लिए चश्मा खरीद रहे हैं, तो उसमें UV400 या 100% UVA और UVB प्रोटेक्शन की जानकारी जरूर चेक करें। यह आंखों को सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने में मदद करता है। ध्यान रखें कि सिर्फ गहरे रंग के लेंस का मतलब UV प्रोटेक्शन होना नहीं है।
6. एंटी-ग्लेयर और ब्लू लाइट फिल्टर को समझें
अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करते हैं, तो एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग आपके लिए उपयोगी हो सकती है। इससे लेंस पर पड़ने वाली चमक कम होती है।
वहीं, ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मों को लेकर यह समझना जरूरी है कि इनके जरिए डिजिटल स्क्रीन से होने वाली आंखों की थकान या नुकसान को रोकने के ठोस प्रमाण सीमित हैं। स्क्रीन इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना ज्यादा उपयोगी है।
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चश्मे का फ्रेम और लेंस चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
7. कीमत के साथ वारंटी और क्वालिटी भी देखें
चश्मा खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला न करें। लेंस और फ्रेम की क्वालिटी, फिटिंग, रिपेयर और वारंटी की जानकारी जरूर लें। इसके अलावा दुकानदार से पूछें कि लेंस पर कौन-सी कोटिंग है और उसकी देखभाल कैसे करनी है। बिल लेना न भूलें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत या बदलाव कराया जा सके।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
चश्मा खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला न करें। लेंस और फ्रेम की क्वालिटी, फिटिंग, रिपेयर और वारंटी की जानकारी जरूर लें। इसके अलावा दुकानदार से पूछें कि लेंस पर कौन-सी कोटिंग है और उसकी देखभाल कैसे करनी है। बिल लेना न भूलें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत या बदलाव कराया जा सके।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।