दुनियाभर में अब तक पांच करोड़ 95 लाख से भी अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं जबकि 14 लाख से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है। सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले में अमेरिका जहां पहले स्थान पर है तो वहीं भारत दूसरे। अमेरिका में अब तक एक करोड़ 27 लाख से अधिक लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं जबकि भारत में भी यह आंकड़ा 91 लाख से ऊपर पहुंच चुका है। इससे बचने के लिए अभी भी सबसे कारगर उपायों में मास्क पहनना शामिल है। वैसे तो एन-95 मास्क को काफी सुरक्षित बताया जाता है, लेकिन क्या इसे धोकर फिर से इस्तेमाल करना सुरक्षित होता है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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Coronavirus: एन-95 मास्क को धोकर इस्तेमाल करना कितना सुरक्षित है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Tue, 24 Nov 2020 12:17 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Tue, 24 Nov 2020 12:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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एन-95 मास्क को धोकर प्रयोग करना कितना सुरक्षित है?
- दिल्ली के लेडी हार्डिंग कॉलेज के डॉ. घनश्याम पांग्टेय बताते हैं, 'एक एन-95 मास्क को चार बार प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए लोगों के पास 3-4 मास्क होने चाहिए, ताकि प्रत्येक मास्क का नंबर तीसरे या चौथे दिन आए। एन-95 मास्क धो नहीं सकते हैं। धोने से मास्क में वायरस को रोकने की क्षमता कम हो जाती है और कई बार खत्म भी हो जाती है। डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी, पुलिस बल और अन्य फ्रंट लाइन वर्कर तो धुले हुए एन-95 मास्क का प्रयोग कतई नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वो संक्रमित लोगों के सीधे संपर्क में आते हैं।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन 70.4 प्रतिशत तक गुणवत्ता वाली है, इस पर क्या कहेंगे?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय कहते हैं, 'दुनियाभर में 100 से ज्यादा वैक्सीन ट्रायल मोड में हैं। उनमें 10-12 वैक्सीन आखिरी फेज में चल रही हैं। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन थर्ड फेज के ट्रायल में 70-90 प्रतिशत तक गुणवत्ता वाली है। इसके अलावा कई वैक्सीन हैं, जैसे फाइजर, मॉडर्ना, जिनकी गुणवत्ता 90-95 प्रतिशत बताई गई है। इनमें भारत की कोवैक्सीन भी शामिल है। हां, ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह अन्य की अपेक्षा थोड़ी सस्ती है।'
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लोग कोविड प्रोटोकॉल को भूल चुके हैं, ऐसे लोगों को क्या कहेंगे?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय कहते हैं, 'त्योहार बीत चुके हैं, लेकिन अभी लोग फेस्टिव मूड में हैं और मिलना-जुलना वैसे ही बढ़ा रहे हैं, जिसकी वजह से स्थिति चिंताजनक हो रही है। जिस तरह से केस कम होने के बाद फिर से तेजी से बढ़ रहे हैं, कहीं ऐसा न हो कि अस्पताल में बेड कम पड़ने लगें। ऐसा हुआ तो लोगों में पैनिक बढ़ेगा और संक्रमित बढ़ते जाएंगे। इसलिए प्रोटोकॉल को फॉलो करें।'
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कोरोना काल में गरम खाना खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन ऑफिस, स्कूल में ऐसा संभव नहीं है, ऐसे में क्या करें?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय बताते हैं, 'कोरोना काल में लोगों को गरम खाना खाने या गर्म पानी पीने को कहा जाता है, लेकिन अगर गर्म करने की व्यवस्था नहीं है तो परेशान न हों। अगर खाना घर का है और किसी और के संपर्क में नहीं आया है तो संक्रमण की संभावना कम है। जहां तक ठंडा की बात है तो कई लंच बॉक्स ऐसे आ गए हैं कि जिसमें जिस तापमान पर खाना पैक करते हैं, कई घंटे तक उस तापमान पर बना रहता है। इसके अलावा ध्यान इस बात का रखना है कि खाना या लंच अकेले में करें।'