Corona virus in India: लॉकडाउन में क्यों जरूरी है एंगर मैनेजमेंट, जानिए खास बातें
क्या होता है एंगर मैनेजमेंट
कैसे होती है एंगर मैनेजमेंट की थेरेपी
लॉकडाउन में एंगर मैनेजमेंट के फायदे
लॉकडाउन में कुंठा का प्रबंधन करें, डायरी लिखें
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विस्तार
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया है। ऐसे में लोग काफी दिनों से अपने घरों में ही बंद हैं। कई लोग घरों में बंद-बंद रहने से बोरियत महसूस कर रहे हैं तो कई लोग चिढ़चिढ़ा गए हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि धीरे-धीरे गुस्सा आपके जीवन का एक हिस्सा बन चुका है? बात चाहे छोटी हो या बड़ी इसपर आपके द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया काफी मायने रखती है। वैसे तो गुस्सा करना एक साधारण सी बात है लेकिन इसका नियंत्रण से बाहर होना, बेवजह गुस्सा होना या अधिकतर गुस्से की मानसिकता में रहना गंभीर बात है। अपने निजी और सामाजिक जीवन को सफल बनाने के लिए क्रोध प्रबंधन यानी एंगर मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। क्रोध प्रबंधन आपका नजरिया और रोजमर्रा के व्यवहार के प्रति आपकी सोच भी बदलने में मदद कर सकता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से क्रोध प्रबंधन के बारे में सबकुछ बताएंगे।
एंगर मैनेजमेंट क्या है
जब भी आपको गुस्सा आए उस स्थिति को समझना और उस पर काबू पाना ही क्रोध प्रबंधन यानी एंगर मैनेजमेंट है। इसको जिस विधि के द्वारा समझा या किया जाता है उसको क्रोध प्रबंधन थेरेपी यानी एंगर मैनेजमेंट थेरेपी कहा जाता है।
क्रोध प्रबंधन यानी एंगर मैनेजमेंट के अंतर्गत-
- गुस्सा आने के संकेतों को समझना, उनको प्रारंभिक तौर पर जानना।
- उनको किस तरह नियंत्रित किया जा सकता है, उसको जानना
- और उससे जीतना सिखाया जाता है।
गुस्से को व्यक्त करने की कला सिखाता है एंगर मैनेजमेंट-
क्रोध प्रबंधन यानी एंगर मैनेजमेंट का अर्थ ये भी होता है कि आप गुस्से को महसूस ही नहीं करें। गुस्से को अपने अंदर दबा लें। एंगर मैनेजमेंट आपको यह गुर सिखाता है कि आप उसको कैसे और किस तरह से सबके सामने व्यक्त करें।
- अपनी बात रखने की कला।
- अपने शब्दों को नियंत्रित करने का सलीका।
- गुस्से में आपका व्यवहार।
- गुस्से में आपका क्रियाकलाप कैसा हो।
- क्रोध के दौरान किस तरह आप गलत प्रतिक्रियायों और क्रियाकलापों से बच सकें।
एंगर मैनेजमेंट थेरेपी यानी क्रोध प्रबंधन चिकित्सा कैसे होती है
तर्कसंगत और उचित गुस्सा सबको आता है, लेकिन उसको व्यक्त करने का एक संतुलित दायरा होता है। अगर ये गुस्सा सीमा से ज्यादा हो और अनियंत्रित हो तब आपको शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का नुकसान हो सकता है।
शारीरिक रूप से गुस्से का प्रभाव-
- हाइपर टेंशन
- हाई ब्लड प्रेशर
- ह्रदय और पाचन में परेशानी
मानसिक रूप से गुस्से का प्रभाव-
- चिंता
- तनाव
- अवसाद
- शर्म महसूस होना ( बिन वजह )
- रोष
- खुद को चोट पहुंचाने की चेष्टा।
- मानसिक थकान
- और भावनात्मक असंतुलन।
हर रोज कोई ना कोई घटना आपके गुस्से को मौका देती है, आपको गुस्सा आने की वजह प्रदान करती है। ऐसे में एंगर मैनेजमेंट थेरेपी आपकी मदद कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों को कैसे संभाला जाए यही एंगर मैनेजमेंट थेरेपी सिखाती है।
एंगर मैनेजमेंट में उपयोग की जाने वाली कुछ तकनीक
छोटी- छोटी बातों का ख्याल रखकर आप बहुत बड़ी परेशानियों से बच सकते हैं। अपने क्रियाकलापों में बदलाव लेकर और अपने व्यवहार पर नियंत्रण करके आप क्रोध, रोष और अवसाद से बच सकते हैं।
एंगर मैनेजमेंट में उपयोग की जाने वाली कुछ तकनीक निम्नलिखित हैं -
खुद को जागरूक रखें-
आपको कब और कितना गुस्सा आता है इसका हिसाब रखें और यह पहचान करें कि कब ज्यादा और कब कम गुस्सा आपको आता है। इससे आपको एंगर मैनेजमेंट में सहायता मिलेगी।
ध्यान( मेडिटेशन) लगाएं-
ध्यान लगाने का प्रयास करें। इससे चेतना के स्तर पर बदलाव आएगा और आप क्रोध के विचार से ऊपर उठेंगे।
सांसों का अभ्यास( सांस संबंधित तकनीक)-
जब भी आपको गुस्सा आए गहरी सांस ले और पूरी सांस लें।
हर सांस में खुद को शांत रहने के लिए आदेश देते रहें।
आना-पान करें ( सांसो को आता- जाता देखें और मन शांत रखने के लिए शुद्ध सांस पर ध्यान लगाएं
ऐसा लगभग 10 बार करें या तबतक करते रहें जबतक आपका गुस्सा शांत नहीं हो जाता।)
रिलेक्सेशन रणनीति तैयार करें-
इसके लिए जब आपका गुस्सा बढ़ रहा हो तो ये सब कीजिए-
- अच्छा संगीत सुनें।
- व्यायाम करें।
- अपने दोस्तों से बहुत बातचीत करें।
- कलात्मक कार्यों में अपने समय को लगाएं।
- हर नकारातमक चीज से दूरी बना लें।
- उन सब बातों और चीजों को छोड़ दें जो आपको मानसिक तकलीफ देती हों।
- अपने मनपसंद खाने को बनाएं और उसको खाने का आनंद लें।
- फिल्में देखें और छोटे बच्चों के क्रियाकलापों को ध्यान से देखें, उनसे बात करें।
- सबसे महत्पूर्ण अपने लिए मदद हासिल करने का काम करें।
क्या करता है मनोचिकित्सक-
- आपकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री जानता और समझता है
- आपको कोई लत तो नहीं यह जानता है
- क्या बात आपको बुरी और क्या बहुत अच्छी लगती है ये समझता है
- किन बातों और वजह से आप अनियंत्रित हो जाते हैं ये सर्च करता है
- आपके सकारात्मक और नकारात्मक बिंदुओं को समझता है
- यह सब जानकार वो आपका इलाज शुरू करता है।
जानिए एंगर मैनेजमेंट के फायदे
- आप स्थिति को अच्छी तरह संभालना सीख जाते हैं
- सोच समझकर अपनी बात रखना जान जाते हैं
- अपने क्रोध को काबू करना सीख जाते हैं
- नकारात्मक विचारों पर लगाम लगाना सीख जाते हैं
इससे आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहता है-
- तनाव
- नींद ना आना
- हाई ब्लड प्रेशर
- सिरदर्द आदि परेशानियां कम हो जाती हैं और आपकी पाचन क्रिया भी अच्छी हो जाती है, जिससे आप अधिक फुर्तीले और उत्साहवर्धक रहते हैं।
- मानसिक और सामाजिक परेशानी से बच जाते हैं जैसे,
- कार्यस्थल पर तनाव
- मनमुटाव
- और आपसी रिश्तों में कड़वाहट आदि में सुधार होता है।
कुंठा का प्रबंधन करें, डायरी लिखें
- अपने लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी है डायरी लिखना
- जब भी आप अपना लक्ष्य लिखते हैं, वो संकेत मनोवैज्ञानिक तौर पर आपके दिमाग में जाते हैं। उनका ब्लूप्रिंट बन जाता है।
दूसरों को समझने के लिए डायरी लेखन जरूरी है-
जब भी आप कुछ लिखते हैं तो आप आसानी से खुद को समझ पाते हैं। जब आप खुद को समझने लगते हैं तो अपने आस- पास के लोगों को भी समझने लगते हैं।
भावनात्मक उपचार के लिए जरूरी है डायरी लेखन-
जब आप डायरी लिखने लगते है तो आपका भावनात्मक विकास होता है। आप आसानी से चीजों को समझने लगते हैं। नियमित रूप से डायरी लेखन आपको वर्तमान में रहने की प्रेरणा भी देता है।
आपकी सोच को सकारात्मक और मजबूत बनाता है डायरी लेखन-
जो आप कभी नहीं बोलते हैं और उसको व्यक्त करने से कतराते हैं उसको मजबूती देता है डायरी लेखन। आपकी सोच को बढ़ाने में मदद करता है।
याददाश्त मजबूत करता है डायरी लेखन-
हर बात हमेशा याद रहे यह जरूरी नहीं, इसके लिए डायरी लेखन बहुत अच्छा साबित होता है। आपको व्यवस्थित बनाए रखता है डायरी लेखन।
आत्मसम्मान की भावना बढ़ाता है डायरी लेखन-
जब भी आप अपनी डायरी में अपने गर्व के पलों को लिखते हैं, उनको कभी बाद में पढ़ते हैं तो आत्मसम्मान महसूस होता है। आपको खुशी देता है। आपकी सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम बन जाता है डायरी लेखन।
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
(भगवदगीता, द्वितीय अध्याय, श्लोक 63)
इस श्लोक का अर्थ है- क्रोध से मनुष्य की मति मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है जिससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से ही मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद अपना ही नाश कर बैठता है।
क्रोध को नियंत्रित करें और सकारात्मक रहकर आगे बढ़ें, इस लेख का यही मकसत है कि लॉकडाउन की परिस्थितियों में घबराएं नहीं बल्कि अपने आप को मजबूत और ऊर्जावान रखें। एंगर मैनेजमेंट की कला सीखें जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक की सलाह और परामर्श लें ।
( नोट- अमर उजाला आपको किसी तरह की चिकित्सा से संबंधित सलाह नहीं दे रहा है, किसी भी उपचार के लिए आप डॉक्टर से सलाह और परामर्श जरूर लें। एंगर मैनेजमेंट थेरेपी किसी मानसिक स्वस्थ पेशेवर से ही सलाह लेकर लें, वो ज्यादा लाभकारी होती है। )
Bibliography and References-
Expert- Dr. Rohit Sharma Psychiatrist.
Yog Expert- Savita Tiwari, Dr Saraswati Kala and Vaibhav kumar
Gym Expert- Manoj Chauhan
Meditation and Unlock Happiness Therapy Expert - Prof Umesh Arya
*(Questionnaire Based).
*( Interview Based)
Anger management: 10 tips to tame your temper
https://www.mayoclinic.org/healthy-lifestyle/adult-health/in-depth/anger-management/art-20045434
Strategies for controlling your anger:
https://www.apa.org/helpcenter/controlling-anger
How to Control Anger: 25 Tips to Help You Stay Calm
https://www.healthline.com/health/mental-health/how-to-control-anger#1
Anger Management Exercises to Help You Stay Calm
https://www.healthline.com/health/anger-management-exercises
What Is the 4-7-8 Breathing Technique?
https://www.healthline.com/health/4-7-8-breathing#1
*Emotional wellbeing and its relation to health
*Available from: Physical disease may well result from emotional distress.
*Available from: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1114432/
*World Health Organisation. The constitution of the World Health Organisation. WHO Chronicle 1947.
'In 1947 the World Health Organisation defined health as “a state of complete physical, mental and social wellbeing.”
*Available from: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20267861