कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकरमाइकोसिस जानलेवा साबित हो रहा है। कई मरीजों की तो आंखें तक निकालनी पड़ रही हैं, क्योंकि संक्रमण को फैलने से रोकने का यही तरीका है। पूरे देश में ऐसे कई मरीज हैं, जिन्हें म्यूकरमाइकोसिस के कारण अपनी आंखें खोनी पड़ी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जब संक्रमण घातक हो चुका होता है और मरीजों की आंखों की रोशनी जा चुकी होती है, तब संक्रमण को दिमाग तक पहुंचने से रोकने के लिए डॉक्टरों को उनकी आंख निकालनी पड़ती है। इसके अलावा चूंकि कोरोना वायरस आंखों के जरिये भी शंरीर में प्रवेश कर सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि लोग अपनी आंखों की अच्छे से देखभाल करें, ताकि किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा न हो। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि इस कोरोना काल में आंखों की देखभाल कैसे करें और जो लोग कोविड की वजह से आंखों का इलाज नहीं करा पा रहे हैं, वो क्या करें?
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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना काल में कैसे करें आंखों की देखभाल? ब्लैक फंगस का भी है खतरा
Mon, 07 Jun 2021 11:49 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 07 Jun 2021 11:49 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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म्यूकरमाइकोसिस से आंखों पर काफी प्रभाव पड़ा है, लोगों को क्या सलाह है?
- दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. जे. एस. तेतियाल कहते हैं, 'म्यूकरमाइकोसिस सबसे पहले नाक और गले में पहुंचता है। अगर वहां बीमारी पकड़ में आ जाती है तो आंखों तक नहीं पहुंचती है, लेकिन अगर फंगस आगे बढ़ गई है, तो आंख और फिर ब्रेन (मस्तिष्क) में पहुंच जाती है। लेकिन ये उन्हीं में होता है, जिनकी इम्यूनिटी कम हो गई है, डायबिटीज वाले मरीज हैं, कोविड मरीज ने स्टेरॉयड ज्यादा ले ली है। हालांकि इनकी संख्या भी बहुत कम, 15 प्रतिशत तक ही होती है।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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जो लोग कोविड की वजह से आंखों का इलाज नहीं करा पा रहे हैं, वो क्या करें?
- डॉ. जे. एस. तेतियाल कहते हैं, 'आंखों में अगर कोविड की वजह से या अन्य कारणों से समस्या है तो पहले टेली कंसल्टेंसी के जरिये संपर्क कर सकते हैं। लेकिन अगर कोई टेस्ट कराना है या समस्या ज्यादा गंभीर है तो ऐसे लोगों को अस्पताल बुलाया जाता है। जहां तक सर्जरी और अन्य मरीज जैसे डायबिटीज वाले मरीज हैं, कई बार इनकी समय-समय पर आंखों की जांच जरूरी होती है। ऐसे में लॉकडाउन जब खुलेगा तो डॉक्टर से समय ले कर जा सकते हैं। लेकिन मास्क लगाकर ही जाएं, खुद के लिए खाने-पीने की व्यवस्था करके आएं, ताकि अगर देर भी होती है तो आपको परेशान नहीं होना होगा।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोरोना काल में आंखों की कैसे देखभाल करें?
- डॉ. जे. एस. तेतियाल कहते हैं, 'अगर बाहर जा रहे हैं तो चश्मा लगा कर जाएं। अगर चश्मा नहीं लगा है तो बाजार से गॉगल खरीद सकते हैं। इससे आंखें भी सुरक्षित रहेंगी। चश्मा लगाकर जब मास्क लगाएं, तो इस तरह से लगाएं कि चश्मे के नीचे का भाग मास्क को दबा दे। इससे चश्मे पर भाप भी नहीं बनेगी। जब भी आंख को छुएं तो हाथ को सैनिटाइज कर लें या साबुन पानी से अच्छी तरह से साफ कर लें। इससे आंखों के जरिये अगर संक्रमण की संभावना है, तो उससे बचे रहेंगे।'
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किस तरह का चश्मा लगाना अच्छा होगा?
- डॉ. जे. एस. तेतियाल कहते हैं, 'बड़े गॉगल्स लीजिए, क्योंकि छोटे चश्मे से आस-पास से हवा और कण जाने की संभावना होती है। गॉगल साइड से भी कवर करे तो अच्छा है। सनग्लासेस भी ले सकते हैं। लेकिन ऐसे लें कि उसकी ग्लास साफ हो, ताकि देखने में परेशानी न हो। बाहर से आने के बाद गॉगल को अच्छे से साफ कर लें। बहुत ज्यादा रगड़ें नहीं, वरना स्क्रैच आने पर साफ देखने में परेशानी आएगी।'