Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
इस कोरोना काल में सबसे ज्यादा जिस चीज पर ध्यान दिया जा रहा है, वह है हमारी इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता, क्योंकि यही वो इकलौती चीज है जो हमें किसी भी तरह के संक्रमण से बचाती है। हमारी इम्यूनिटी ही हमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाती है। अगर हमारी इम्यूनिटी मजबूत है तो फेफड़े, किडनी और लिवर के संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचाव संभव है। चूंकि पहले लोग अपनी इम्यूनिटी पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देते थे, लेकिन कोरोना के आने के बाद से लोग काफी सतर्क हो गए हैं। ऐसे में यह सवाल बेहद ही जरूरी हो जाता है कि हम आखिर अपनी कमजोर इम्यूनिटी को कैसे पहचानें? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कमजोर इम्यूनिटी के लक्षणों के बारे में...
कोरोना वायरस: कैसे पता चले कि हमारी इम्यूनिटी कमजोर है? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
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बार-बार बीमार पड़ना
- अगर आप ज्यादातर बीमार रहते हैं या बार-बार बीमार पड़ते हैं, इसके अलावा लगातार कमजोरी रहती है तो समझ जाइए कि आपकी इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। वैसे अक्सर कई लोगों को मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम और बुखार की समस्या हो जाती है, यह भी आपकी कमजोर इम्यूनिटी की ओर इशारा करती है।
हमेशा थकान या आलस महसूस होना
- अगर आपको हमेशा थकान या आलस महसूस होता है, शरीर में दर्द बना रहता है, तो यह दर्शाता है कि आपकी इम्यूनिटी कमजोर है। इसके अलावा सुबह उठकर ताजा महसूस न करना और पूरे दिन एनर्जी लेवल का कम रहना भी आपकी कमजोर इम्यूनिटी की ओर इशारा करता है।
घाव भरने में ज्यादा समय लगना
- अगर आपके शरीर में कहीं घाव है और उसे भरने में अन्य लोगों की तुलना में अधिक समय लग रहा है तो समझ जाइए कि आपकी इम्यूनिटी कमजोर है। दरअसल, जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, उनके घावों पर जल्द ही सूखी पपड़ी बन जाती है, जो शरीर से खून को निकलने से रोकती है, लेकिन अगर आपके घाव पर जल्दी पपड़ी नहीं बनती तो यह कमजोर इम्यूनिटी का संकेत हो सकता है।
पेट संबंधी समस्याओं का होना
- अक्सर ऐसा देखा गया है कि जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनका पाचन तंत्र भी कमजोर रहता है और ऐसे में उन्हें दस्त, गैस, सूजन, ऐंठन या कब्ज की शिकायत हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा हमेशा चिड़चिड़ापन महसूस होना भी कमजोर इम्यूनिटी का लक्षण हो सकता है।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।