Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
देश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कोविड के 47 हजार से अधिक नए मामलों की पुष्टि हुई है। जिस तरीके से कुछ राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए देश में तीसरी लहर का खतरा भी मंडराने लगा है। हालांकि कोरोना के खिलाफ देश में टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चल रहा है। अब तक लोगों को 65 करोड़ 41 लाख से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। अब संक्रमण के बढ़ते मामले और टीकाकरण के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या सरकार कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज बंद कर सकती है? दरअसल, यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि कुछ विशेषज्ञों का यह मानना है कि देश की आधी से ज्यादा आबादी के लिए कोरोना वैक्सीन की दो खुराक लेना जरूरी नहीं है।
जरूरी खबर: क्या कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज बंद कर सकती है सरकार? जानिए विशेषज्ञों की राय
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चिकित्सीय अध्ययनों के आधार पर कुछ विशेषज्ञों का यह मानना है कि संक्रमण से ठीक होने वालों में वैक्सीन की एक खुराक ही काफी है। अध्ययनों के मुताबिक, ऐसे लोगों को जब तीन महीने बाद वैक्सीन की दूसरी खुराक दी जाती है तो उससे शरीर में कोई भी बदलाव नहीं मिलता।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीएमआर के चौथे सीरो सर्वे में देश की 67.6 फीसदी आबादी में कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी मिली थी। इसका मतलब ये है कि दूसरी लहर में देश की आधी से अधिक आबादी कोरोना से संक्रमित हुई और फिर बाद में वे लोग ठीक हो गए।
कुछ महीने पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों द्वारा किए गए एक शोध में भी यह पाया गया था कि कोरोना के संक्रमण से ठीक हुए लोगों में वैक्सीन की एक डोज ही पर्याप्त है। इस शोध में यह किया गया था कि वैक्सीन की पहली डोज पहले 10 दिन में ही कोरोना संक्रमण से उबर चुके लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडी बना देती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार कोरोना होने के बाद दूसरे वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा कम ही सही, लेकिन रहता जरूर है। इसलिए सरकार की दो डोज की गाइडलाइन को ही फॉलो करना सही है। आजकल अलग-अलग प्रकार के वैरिएंट भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें बेहद ही खतरनाक माना जा रहा है। ऐसे में वैक्सीन की दो डोज नहीं लेने पर ये और भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। हालांकि यह साबित करने के लिए अभी तक कोई रिसर्च उपलब्ध नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि वैक्सीन लेने के बाद भी सावधानी बहुत जरूरी है।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।