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Covid-19: चौथी लहर को लेकर महामारी विज्ञानी का बड़ा दावा, जानिए इस बार कितनी गंभीरता की आशंका?

Fri, 29 Apr 2022 02:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 29 Apr 2022 02:20 PM IST
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Corona Fourth Wave Symptoms and risk in india, Covid-19 cases and latest news update
देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : iStock

देश में पिछले कुछ हफ्तों से जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल देखी जा रही है, उसके कारण चौथी लहर की आशंका बढ़ गई है। दुनिया के कई देशों से सामने आ रहे आंकड़े भी इसी तरफ इशारा करते हैं। चीन में जिस तरह से विशेष सख्ती के बाद भी संक्रमण के मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है, वह भारत के लिए भी अलार्मिंग है। चीन में जीरो कोविड टॉलरेंस नीति के बाद दैनिक मामलों में तेजी से बढ़ोतरी रिकॉर्ड हो रही है, जिसके चलते कई हिस्सों में सख्त लॉकडाउन लगाया गया है। लाखों की संख्या में लोगों की मास टेस्टिंग की जा रही है ताकि प्रसार को नियंत्रित किया जा सके। ब्रिटेन में भी ऐसे ही हालात बिगड़ने की खबरें हैं। इन देशों से सबक लेते हुए भारत में भी कई राज्यों में मास्क लगाने को लेकर नियमों को दोबारा से सख्त कर दिया गया है।



पिछले कुछ हफ्तों से देश में संक्रमण के रोजाना के आंकड़ों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। गुरुवार को देश में कोरोना के 3377 नए मामले दर्ज किए गए जबकि 60 लोगों की संक्रमण से मृत्यु हुई। बुधवार की तुलना में यह आंकड़ा अधिक है। रोजाना बढ़ते कोरोना के केस ने चौथी लहर की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर लोगों में ओमिक्रॉन BA.1 और BA.2 संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं। ओमिक्रॉन BA.2 की संक्रामकता दर अधिक है, जिससे लोगों को विशेष बचाव करते रहने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं कि संभावित चौथी लहर को लेकर विशेषज्ञों की क्या सोच है, क्या यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है?

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कोविड-19 के मामले - फोटो : iStock

देश में बढ़ते कोरोना के मामले

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस तरह से देश में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों में तेजी आई है, साथ ही ओमिक्रॉन की संक्रामकता दर को देखते हुए चौथी लहर की आशंका जरूर है, हालांकि इस बारे में विशेषज्ञ फिलहाल कुछ स्पष्ट स्थिति में नहीं हैं।

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर के भूतपूर्व प्रोफेसर और प्रख्यात वायरोलॉजिस्ट डॉ टी जैकब जॉन कहते हैं, फिलहाल देश में कोविड-19 की चौथी लहर की आशंका बेहद कम मान कर चली जा रही है, पर इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। कुछ राज्यों में दैनिक संक्रमण के मामले तेजी से रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जोकि चिंता बढ़ाने वाले हैं। 

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देश में बढ़ती चौथी लहर की आशंका - फोटो : PTI

क्या कहते हैं महामारी विज्ञानी?

डॉ जैकब जॉन कहते हैं, आंकड़े बताते हैं कि मार्च और अप्रैल में संक्रमण की दर स्थिर बनी हुई है। दिल्ली और हरियाणा में पिछले दो से तीन सप्ताह में जरूर वृद्धि हुई है। दिल्ली में प्रति पांच लाख की आबादी पर  एक हजार मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

देश में कोरोना के एंडेमिक स्टेज की उम्मीद की जा रही है, इसमें फिलहाल संख्या में निरंतर गिरावट हो यह जरूरी नहीं है। नए कोरोना वैरिएंट्स अगर अधिक प्रभावी होते हैं तो चौथी लहर आ सकती है, हालांकि इसकी आशंका फिलहाल बहुत कम है।

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संक्रमण की चौथी लहर की आशंका - फोटो : iStock

चौथी लहर की गंभीरता?

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट में देश में चौथी लहर की गंभीरता के बारे में डॉ जैकब जॉन कहते हैं, अगर चौथी लहर आती भी है तो इसके बहुत गंभीर होने की आशंका नहीं है। डॉ जैकब कहते हैं, अगर चौथी लहर आती है तो यह मेरे लिए बहुत आश्चर्य की बात होगी। यह गंभीर तो नहीं ही होनी चाहिए। देश में ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका है ऐसे में  लहर के दुष्प्रभावों की आशंका कम है। हमें अधिक बचाव के लिए बूस्टर शॉट के बारे में भी विचार करना चाहिए।

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कोरोना की कम होती एंटीबॉडीज - फोटो : iStock

लोगों में कम हो गई हैं एंटीबॉडीज

वहीं अमर उजाला से बातचीत में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के  शोधकर्ता प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे (साइटोजेनेटिक्स लैब, जूलॉजी विभाग) कहते हैं, देश में जिस तरह से कोरोना की रफ्तार है, ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले दिनों में हमें एक और लहर का सामना करना पड़ सकता है। ज्यादातर वैक्सीनेटेड लोगों में निर्मित एंटीबॉडीज का स्तर पहले से काफी कम हो गया है। 30 फीसदी लोगों में तो एंटीबॉडीज का स्तर लगभग खत्म हो चुका है, जो उनमें संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकती है।

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