अल्जाइमर रोग, मस्तिष्क से संबंधित विकार है जो धीरे-धीरे स्मृति और सोचने के कौशल को कम करने लगती है, इसे डिमेंशिया रोग के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में अल्जाइमर रोग होने का खतरा अधिक होता है। वैश्विक स्तर पर साल 2019 में, अल्जाइमर और डिमेंशिया रोगियों की संख्या 1990 की तुलना में 160.84% अधिक दर्ज की गई थी। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर समस्या के तौर पर जानते हैं, जिसमें रोगों को शीघ्र इलाज की आवश्यकता होती है।
Alzheimer's Disease: इस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से बचाएगी ग्लूटाथियोन थेरेपी, 50 लाख से अधिक को मिलेगा लाभ
ग्लूटाथियोन थेरेपी को लेकर अध्ययन
इस परीक्षण का उद्देश्य न केवल रोगियों को समय पर इलाज उपलब्ध करना है साथ ही संभावित रूप से प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल बीमारी से लोगों को बचाना भी है। यह अध्ययन जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा वित्त पोषित है।
गौरतलब है कि अल्जाइमर रोग के लिए अब तक कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाएं अस्थायी रूप से लक्षणों को बिगड़ने से रोकने में मददगार हो सकती हैं। दवाओं के साथ थेरेपी की मदद से भी व्यवहार संबंधी लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लूटाथियोन की मदद से इस रोग में लाभ पाया जा सकता है।
ग्लूटाथियोन के कार्यों को जानिए
ग्लूटाथियोन मस्तिष्क में मौजूद एक रसायन और एंटीऑक्सीडेंट है। मस्तिष्क अपने सामान्य कामकाज के लिए ऑक्सीजन का उपभोग करता है और इस प्रक्रिया में, मस्तिष्क में स्वाभाविक रूप से मौजूद आयरन सहित धातुओं से चार्ज्ड पार्टिकल्स बनाते हैं। ये चार्ज्ड पार्टिकल्स मिलकर रेडिकल बनाते हैं, जो मस्तिष्क में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ावा दे सकता है जिसके कारण मस्तिष्क कोशिकाओं या न्यूरॉन्स में क्षति का खतरा रहता है। शोधकर्ता अब ग्लूटाथियोन के उपयोग को आशाजनक रूप में देख रहे हैं।
अब तक के अध्ययनों में क्या पता चला?
जानवरों पर किए गए अध्ययन में ग्लूटाथियोन थेरेपी की मदद से विषाक्त कणों को निष्ट करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से मस्तिष्क को सुरक्षित रखने के प्रमाण मिले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षणों में ग्लूटाथियोन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकेगी।
नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी), गुरुग्राम के वरिष्ठ वैज्ञानिक और परीक्षण के प्रमुख प्रवत मंडल कहते हैं, हम ग्लूटाथियोन लेने के बाद लोगों के संज्ञानात्मक सुधार को लेकर आशान्वित और सकारात्मक हैं।
पांच मिलियन भारतीय लोगों को मिल सकेगा लाभ
यदि यह प्रभावी साबित हुआ, तो हल्के स्तर की संज्ञानात्मक हानि की समस्याओं (एमसीआई) और प्रारंभिक अल्जाइमर रोग वाले लगभग 5 मिलियन भारतीयों को लाभान्वित कर सकता है। गौरतलब है कि अल्जाइमर एसोसिएशन, यूएस ने इस साल की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के 8.8 मिलियन भारतीयों को डिमेंशिया का खतरा है, यह वृद्धजनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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