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Alzheimer's Disease: इस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से बचाएगी ग्लूटाथियोन थेरेपी, 50 लाख से अधिक को मिलेगा लाभ

Fri, 11 Aug 2023 05:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 11 Aug 2023 05:47 PM IST
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clinical trial for effectiveness of antioxidant glutathione against early Alzheimer's disease
अल्जाइमर रोग से बचाव के लिए उपाय - फोटो : iStock

अल्जाइमर रोग, मस्तिष्क से संबंधित विकार है जो धीरे-धीरे स्मृति और सोचने के कौशल को कम करने लगती है, इसे डिमेंशिया रोग के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में अल्जाइमर रोग होने का खतरा अधिक होता है। वैश्विक स्तर पर साल 2019 में, अल्जाइमर और डिमेंशिया रोगियों की संख्या 1990 की तुलना में 160.84% अधिक दर्ज की गई थी। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर समस्या के तौर पर जानते हैं, जिसमें रोगों को शीघ्र इलाज की आवश्यकता होती है।



इस न्यूरोलॉजिकल बीमारी के जोखिमों को कैसे कम किया जा सकता है, इस बारे में शोधकर्ता लगातार अध्ययन कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार अल्जाइमर रोग की प्रारंभिक स्थिति में ग्लूटाथियोन थेरेपी की प्रभाविकता का मूल्यांकन करने के लिए नैदानिक परीक्षण शुरू करने पर काम किया जा रहा है। मौखिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट ग्लूटाथियोन देने से इस रोग की प्रगति पर क्या असर हो सकता है, यह जानने के लिए भारत में अपनी तरह का पहला नैदानिक परीक्षण होगा।

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अल्जाइमर रोग के लिए ग्लूटाथियोन थेरेपी - फोटो : istock

ग्लूटाथियोन थेरेपी को लेकर अध्ययन

इस परीक्षण का उद्देश्य न केवल रोगियों को समय पर इलाज उपलब्ध करना है साथ ही संभावित रूप से प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल बीमारी से लोगों को बचाना भी है। यह अध्ययन जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा वित्त पोषित है।

गौरतलब है कि अल्जाइमर रोग के लिए अब तक कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाएं अस्थायी रूप से लक्षणों को बिगड़ने से रोकने में मददगार हो सकती हैं। दवाओं के साथ थेरेपी की मदद से भी व्यवहार संबंधी लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लूटाथियोन की मदद से इस रोग में लाभ पाया जा सकता है।

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ग्लूटाथियोन थेरेपी के बारे में जानिए - फोटो : istock

ग्लूटाथियोन के कार्यों को जानिए

ग्लूटाथियोन मस्तिष्क में मौजूद एक रसायन और एंटीऑक्सीडेंट है। मस्तिष्क अपने सामान्य कामकाज के लिए ऑक्सीजन का उपभोग करता है और इस प्रक्रिया में, मस्तिष्क में स्वाभाविक रूप से मौजूद आयरन सहित धातुओं से चार्ज्ड पार्टिकल्स बनाते हैं। ये चार्ज्ड पार्टिकल्स मिलकर रेडिकल बनाते हैं, जो मस्तिष्क में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ावा दे सकता है जिसके कारण मस्तिष्क कोशिकाओं या न्यूरॉन्स में क्षति का खतरा रहता है। शोधकर्ता अब ग्लूटाथियोन के उपयोग को आशाजनक रूप में देख रहे हैं। 

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ग्लूटाथियोन थेरेपी से मस्तिष्क को लाभ - फोटो : iStock

अब तक के अध्ययनों में क्या पता चला?

जानवरों पर किए गए अध्ययन में ग्लूटाथियोन थेरेपी की मदद से विषाक्त कणों को निष्ट करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से मस्तिष्क को सुरक्षित रखने के प्रमाण मिले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षणों में ग्लूटाथियोन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकेगी। 

नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी), गुरुग्राम के वरिष्ठ वैज्ञानिक और परीक्षण के प्रमुख प्रवत मंडल कहते हैं, हम ग्लूटाथियोन लेने के बाद लोगों के संज्ञानात्मक सुधार को लेकर आशान्वित और सकारात्मक हैं। 

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भारत में अल्जाइमर रोग का बढ़ता जोखिम - फोटो : Pixabay

पांच मिलियन भारतीय लोगों को मिल सकेगा लाभ

यदि यह प्रभावी साबित हुआ, तो हल्के स्तर की संज्ञानात्मक हानि की समस्याओं (एमसीआई) और प्रारंभिक अल्जाइमर रोग वाले लगभग 5 मिलियन भारतीयों को लाभान्वित कर सकता है। गौरतलब है कि अल्जाइमर एसोसिएशन, यूएस ने इस साल की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के 8.8 मिलियन भारतीयों को डिमेंशिया का खतरा है, यह वृद्धजनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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