चीन की सफलता के पीछे उसकी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का बहुत बड़ा हाथ है। इन दिनों डिजिटल अर्थव्यवस्था का बोझ उठा रहे कोडर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, इंजीनियर, गेम डिजाइनर और आईटी सेक्टर में जुड़े लोगों की रातों नींद इस 996 ने उड़ा दी है। इस 996 के चलते चीन में काम और आराम के बीच तालमेल को लेकर बहस छिड़ गई है। चीन में डिजीटल इंडस्ट्री में काम करने वाले युवा इन दिनों बेहद परेशान हैं। काम के तनाव को लेकर तो लोग भारत में सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं लेकिन 996 एक ऐसी स्ट्रैटजी जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
'996' से बचकर रहें युवा, दिन का चैन और रात की नींद छीन रहा
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996 का मतलब है सप्ताह में छह दिन सुबह नौ से रात नौ बजे तक काम करने के घंटे, इस योजना की मुख्य बात यह है कि इस योजना को युवाओं पर थोपा जा रहा है। चीन के युवाओं ने इस मुद्दे को लेकर बड़े मंचों पर इसकी शिकायत की है। इसको लेकर चीन में आलोचना का माहौल बना हुआ है। लेकिन फिलहाल उन्हें इससे निजात नहीं मिल रही है।
इस योजना में चीन के युवा अपने काम और जीवन में संतुलन को पूरी तरह से खो बैठे हैं। इस योजना से केवल चीनी कंपानीयों को फायदा हो रहा है, जबकि चीनी युवा के वेतनों में कोई वृद्धी नही हो रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 996 ना सिर्फ जीवन में संतुलन को प्रभावित कर रहा है बल्कि तनाव और अवसाद की ओर लोगों को धकेल रहा है।
996 पर काम कराने वाली कंपनियों में हुआवाई और अलीबाबा जैसी कंपनियों के नाम भी हैं। बताया जा रहा है कि चीन में ऐसी करीब 139 कंपनियां हैं, जिनमें 996 का फॉर्मूला लागू हुआ है।
चीनी मीडिया कि रिपोर्ट के अनुसार ई-कॉर्मस कंपनी अलीबाबा के सीईओ जैक मा ने तो यहां तक कह दिया कि 8 घंटे की शिफ्ट में काम करने वालों की अलीबाबा में कोई जगह नहीं है।
डॉक्टरों का मानना है कि सप्ताह के 6 दिन लगातार 12 घंटे काम करने का कल्चर पूरी तरह से गलत है, क्योंकि इससे न सिर्फ व्यक्ति की सेहत पर असर पड़ता है बल्कि एक समय के बाद उस इंसान के काम करने की क्षमता भी बुरी तरह से क्षीण होने लगती है। जिस कारण प्रभावित व्यक्ति का कॉन्सनट्रेशन लेवल भी कम होने लगता है। व्यक्ति का दिमाग सही तरीके से काम कर सके इसके लिए शारीरिक रूप से आराम करना, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना और थोड़ा बहुत मनोरंजन होना भी बेहद जरूरी है।