Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
बड़ों की तरह बच्चों में भी तरह-तरह की बीमारियों का होना काफी आम बात है, लेकिन अगर बीमारियां बच्चों को हो जाएं तो उनपर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत होती है। चूंकि इस समय कोरोना ने देशभर में कहर ढाया हुआ है और बच्चों को भी संक्रमित कर रहा है, ऐसे में और भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। हाल ही में आई बृहन्मुंबई महानगर पालिका के चौथे सीरो सर्वे की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि मुंबई में करीब 50 फीसदी बच्चों में कोरोना की एंटीबॉडी मिली है, यानी वे कभी न कभी कोरोना से संक्रमित रह चुके हैं। ऐसे में एंटीबॉडी बन जाने के कारण तीसरी लहर के दौरान उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा तो कम हो गया है, लेकिन अन्य बीमारियों का खतरा तो बरकरार है, जो हमेशा से बच्चों को प्रभावित करती आई हैं। आइए जानते हैं बच्चों को होने वाली सांस से जुड़ी कुछ बीमारियों के बारे में, जिनके लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सावधान: बच्चों को हो सकती हैं सांस से जुड़ी ये चार बीमारियां, लक्षणों को न करें नजरअंदाज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अस्थमा
- यह बीमारी व्यस्कों के साथ-साथ बच्चों को भी हो सकती है। धूल, मिट्टी और प्रदूषण की वजह से बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना अधिक होती है। इस बीमारी में फेफड़ों का वायुमार्ग संकुचित हो जाता है, जिससे सांस लेने और छोड़ने में दिक्कत महसूस होती है। इसके लक्षणों में बार-बार खांसी होना, सीने में बलगम का जमना, सांस छोड़ते समय सीटी या घरघर की आवाज, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द आदि शामिल हैं।
साइनस
- साइनस एक तरह का नाक में होने वाला संक्रमण होता है, जो बच्चों में भी हो सकता है और बच्चों में यह समस्या गंभीर हो सकती है। अगर बच्चों को दो हफ्ते से ज्यादा समय तक जुकाम रहता है, गला खराब रहता है, नाक और आंखों में सूजन होती है, खांसी होती है, सांस में बदबू आती है, तो ये साइनस के लक्षण हो सकते हैं।
ब्रोंकाइटिस
- यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें फेफड़ों की सबसे बड़ी श्वसन नलिका में सूजन आ जाती है। वैसे तो किसी भी उम्र के व्यक्ति को यह समस्या हो सकती है, लेकिन छोटे बच्चों में यह ज्यादा पाया जाता है। नाक बहना, सीने में दर्द और जकड़न, बुखार और ठंड लगना, खांसी, इस बीमारी के आम लक्षण हैं।
निमोनिया
- यह छोटे बच्चों में होने वाली सबसे आम, लेकिन खतरनाक बीमारी है, जिसे हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके उपचार में देरी बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती है। बच्चों में बुखार, खांसी, सिर दर्द, थकान, गले में खराश, नाक में कफ जमना, सांस तेज चलना, निमोनिया के लक्षण हैं।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।