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रोजाना के नियमों में कर लेंगे ये बदलाव तो नहीं होगा गठिया
Mon, 15 Jul 2019 11:57 AM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Mon, 15 Jul 2019 11:57 AM IST
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घुटनों में होने वाला दर्द कोई सामन्य दर्द नहीं होता। आज के समय में ये परेशानी हर वर्ग के लोगों को हो रही है। लेकिन इसे मामूली दर्द समझ के नजर अंदाज कर देना बहुत बड़ी गलती है क्योंकि ये आगे चलकर गठिया यानी आर्थराइटिस का रूप ले लेती है। आज हम आपको की गठिया जैसी बीमारी से बचने के लिए आपको अपनी लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने होंगे।
पहले गठिया होने की चिंता तब तक नहीं होती थी, जब तक कि कोई 60 की उम्र पार न कर लें। लेकिन आजकल युवा लोगों में भी गठिया के लक्षण देखे जा रहे हैं। यहां तक कि 30-40 की उम्र में भी अर्थराइटिस की दिक्कतें होने लगी हैं और तो और जोड़ों की दिक्कतें 20 की उम्र के बाद से ही शुरू होने लगी हैं। जरूरत से ज्यादा वजन कई बीमारियों का घर है लेकिन इससे गठिया होने का भी काफी खतरा रहता है इसलिए अपना वजन संतुलित रखें।
कुछ डाइट में जरूरत से ज्यादा प्रोटीन की मात्रा पर बल दिया जाता है। जिससे जोड़ों में यूरिक एसिड इकट्ठा हो सकता है, जिससे जोड़ों में सूजन की समस्या हो सकती है। वहीं कुछ डाइट में कम कैलोरी लेने को कहा जाता है, जिससे आप एक तरह से भूखे ही रह सकते हैं। इससे शरीर में कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो सकती है। इससे कार्टिलेज इस हद तक कमजोर हो जाते हैं कि अतिरिक्त वजन भी नुकसान पहुंचा सकती है और अर्थराइटिस का खतरा हो सकता है। अपने डॉक्टर से डाइट की सलाह लें।
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डायबिटीज, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की शरीर की क्षमता को प्रभावित करता है। इससे अर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि यह शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ाने का काम करता है, जिससे जोड़ों में कार्टिलेज को नुकसान पहुंचता है।
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ये चीजें खाने से बचें
-चीनी से शरीर में साइटोकाइंस रिलीज होना शुरू होता है, जो बॉडी में सूजन का कारण बनता है और इस तरह अर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ता है।
-खासकर 'लाल मीट' खाना कम करें क्योंकि इसमें फैट बहुत होता है। जिससे सूजन बढ़ती है, ये तब और ज्यादा होता है, जब मांस ग्रिल्ड, रोस्टेड या फ्राइड होता है।
-परिष्कृत (रिफाइंड) अनाज से ब्लड ग्लूकोज लेवल में बढ़ोतरी हो जाती है, जो शरीर में कई सूजन-संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है।
-रिफाइंड वेजिटेबल तेल भले ही कॉर्न, मूंगफली, सूरजमुखी और सोया में ओमेगा-6 फैटी एसिड भरपूर होता है लेकिन डाइट में हमें इनकी कम मात्रा में ही जरूरत होती है।
-चीनी से शरीर में साइटोकाइंस रिलीज होना शुरू होता है, जो बॉडी में सूजन का कारण बनता है और इस तरह अर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ता है।
-खासकर 'लाल मीट' खाना कम करें क्योंकि इसमें फैट बहुत होता है। जिससे सूजन बढ़ती है, ये तब और ज्यादा होता है, जब मांस ग्रिल्ड, रोस्टेड या फ्राइड होता है।
-परिष्कृत (रिफाइंड) अनाज से ब्लड ग्लूकोज लेवल में बढ़ोतरी हो जाती है, जो शरीर में कई सूजन-संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है।
-रिफाइंड वेजिटेबल तेल भले ही कॉर्न, मूंगफली, सूरजमुखी और सोया में ओमेगा-6 फैटी एसिड भरपूर होता है लेकिन डाइट में हमें इनकी कम मात्रा में ही जरूरत होती है।