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Chandipura Virus: गुजरात के बाद अब राजस्थान में भी संक्रमण की दस्तक, बच्चों में इंसेफेलाइटिस को लेकर अलर्ट

Thu, 01 Aug 2024 03:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 01 Aug 2024 03:43 PM IST
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Chandipura virus in gujrat and rajasthan Acute Encephalitis Syndrome risk in children
चांदीपुरा और इससे इंसेफेलाइटिस का खतरा - फोटो : istock

गुजरात के कई शहरों में करीब दो महीने से रिपोर्ट किए जा रहे चांदीपुरा वायरस के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक राज्य में 59 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। चांदीपुरा वायरस के कारण एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का खतरा देखा जाता रहा है जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर और जानलेवा जोखिमों वाला मानते हैं। छोटे बच्चों में एईएस के मामले गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं।



जून की शुरुआत से, गुजरात में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कई मामले सामने आए हैं। 31 जुलाई 2024 तक देश में एईएस के 148 मामले रिपोर्ट किए गए हैं।  इसमें गुजरात के 24 जिलों से 140, मध्य प्रदेश से 4, राजस्थान से 3 और महाराष्ट्र में एक मामला सामने आयाहै। एईएस से अब तक 59 लोगों की मृत्यु हो गई है।

चांदीपुरा और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है। 

Chandipura virus in gujrat and rajasthan Acute Encephalitis Syndrome risk in children
बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले - फोटो : Istock

राजस्थान में भी पहुंचा चांदीपुरा वायरस

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी उपायों और महामारी को लेकर विस्तृत जांच करने में गुजरात सरकार की सहायता के लिए नेशनल जॉइन्ट आउटब्रेक रिस्पांस टीम (एनजेओआरटी) भी तैनात की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुजरात सहित चांदीपुरा वायरस का खतरा कई राज्यों में बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। गुजरात के बाद राजस्थान में भी अब इस वायरल संक्रमण का खतरा देखा जा रहा है। 
 

Chandipura virus in gujrat and rajasthan Acute Encephalitis Syndrome risk in children
चांदीपुरा वायरस और इसका खतरा - फोटो : Freepik

चांदीपुरा वायरस के बारे में जानिए

चांदीपुरा वायरस के मामले वैसे तो काफी दुर्लभ माने जाते रहे हैं लेकिन संक्रमितों में घातक स्थितियां उत्पन्न होने का खतरा रहता है। बुखार, फ्लू जैसे लक्षणों के साथ शुरू होने वाला ये संक्रमण बच्चों में  इंसेफेलाइटिस का कारण बन सकता है। गंभीर स्थितियों में इसके कारण कोमा और यहां तक कि मृत्यु का भी जोखिम रहता है। इस संक्रमण के कारण मृत्यु दर 56 से 75 प्रतिशत तक देखी जाती रही है। संक्रमण की गंभीर स्थिति में एक्यूट इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) हो सकती है।

एईएस के कारण भ्रम, दौरे पड़ने, कमजोरी और संवेदना की हानि जैसे लक्षण हो सकते हैं जिसमें तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

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Chandipura virus in gujrat and rajasthan Acute Encephalitis Syndrome risk in children
बच्चों में संक्रमण और इसके जोखिम - फोटो : istock

बच्चों को संक्रमण से कैसे बचाएं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों को इस संक्रामक रोग से सुरक्षित रखने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में खेतों या झाड़ियों में जाने से बचें। मच्छरों, टिक्स और मक्खियों से बचाव करें। संक्रमण के लक्षणों के बारे में जानना और समय रहते इलाज प्राप्त करना सबसे आवश्यक हो जाता है। स्वच्छता और जागरूकता ही इस बीमारी के खिलाफ उपलब्ध एकमात्र उपाय है।

चांदीपुरा वायरस का अभी तक कोई उचित इलाज नहीं है। संक्रमण का समय रहते पता लगाने और उपचार प्राप्त होने से रोगी की जान बचाई जा सकती है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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