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World Lung Cancer Day: फेफड़ों के कैंसर को लेकर सामने आई दो चौंकाने वाली जानकारियां, आप भी हो जाएं सावधान

Thu, 01 Aug 2024 02:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 01 Aug 2024 02:17 PM IST
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world lung cancer day 2024 lung cancer in non smokers and young age people
फेफड़ों का कैंसर - फोटो : istock

फेफड़ों के कैंसर का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। ये वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारतीय पुरुषों में लंग्स कैंसर, कैंसर से होने वाली मृत्यु का सबसे आम कारण है। यहां सभी प्रकार के कैंसर के लगभग 5.9% और कैंसर से संबंधित मौतों के लगभग 8.1% मामलों के लिए फेफड़ों के कैंसर को ही जिम्मेदार माना जाता रहा है। वैसे तो ये लंग्स कैंसर किसी भी उम्र और लिंग वालों में हो सकता है, पर पुरुषों में इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। 



दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक करने और इससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल एक अगस्त को वर्ल्ड लंग्स कैंसर डे मनाया जाता है। अध्ययनों में धूम्रपान को इसका सबसे बड़ा कारण बताया जाता रहा है। हालांकि हाल में हुए कई अध्ययन इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि भारत में  फेफड़ों के कैंसर के ज्यादातर मरीजों ने कभी धूम्रपान नहीं किया है। मतलब कि इस कैंसर का जोखिम उन लोगों में भी बढ़ रहा है जो धूम्रपान नहीं करते हैं।

अब सवाल ये है कि चूंकि धूम्रपान इस कैंसर का प्रमुख कारण रहा है तो फिर जो लोग स्मोकिंग नहीं करते हैं उनमें इसका खतरा क्यों बढ़ गया है?

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लंग्स कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : istock

धूम्रपान न करने वालों में भी बढ़ रहा है खतरा 

द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि यह निश्चित ही चौंकाने वाली बात है कि फेफड़ों के कैंसर के ज्यादातर मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। एशिया और पश्चिम के अन्य हिस्सों की तुलना में दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे ज्यादा मरीज ऐसे हैं जिनमें स्मोकिंग की कोई हिस्ट्री नहीं रही है। शोधकर्ताओं का मानना है कि संभवत: बढ़ता वायु प्रदूषण इसका कारण हो सकता है। 

मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर के डॉक्टरों की एक टीम ने इस पेपर का शीर्षक दिया है- 'दक्षिणपूर्व एशिया में फेफड़े के कैंसर की विशिष्टता’

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फेफड़ों के कैंसर का जोखिम - फोटो : istock

भारतीयों में कम उम्र में हो रहा है कैंसर

इस अध्ययन की रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि पश्चिमी देशों में फेफड़ों के कैंसर का पता चलने की औसत आयु  54 से 70 के बीच है, हालांकि भारत में कम से कम 10 साल पहले 44-48 की उम्र वालों में भी इसका निदान किया जा रहा है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि नॉन स्मोकर्स में बढ़ते कैंसर के लिए वायु प्रदूषण और आनुवंशिक उत्परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। फेफड़े के कैंसर की दर जो साल 1990 में प्रति एक लाख लोगों पर पर 6.62 थी वह 2019 में प्रति बढ़कर 7.7 हो गई है।

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वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock

वायु प्रदूषण बड़ा जोखिम

अध्ययन से पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुष इस कैंसर का शिकार अधिक होते हैं। संभवत: पुरुषों में तंबाकू और धूम्रपान की आदत इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर 42.4 प्रतिशत जबकि महिलाओं में 14.2 प्रतिशत है।

अध्ययन के लेखकों ने साल 2022 के विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिण एशिया सबसे प्रदूषित हिस्सों में से एक है। दुनियाभर के 40 प्रदूषित शहरों में से 37 यहीं से हैं। भारत, इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे देश एशिया में सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन देशों में 2020 में 9.65 लाख से अधिक नए मामलों के साथ सबसे ज्यादा फेफड़े के कैंसर के मामले रिपोर्ट किए गए।

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फेफड़ों का कैंसर - फोटो : istock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययनकर्ताओं ने कहा, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में असमानताएं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में फेफड़े के कैंसर के बोझ और मृत्यु के खतरे को बढ़ा रही हैं। बमुश्किल 5 प्रतिशत मरीज ही समय पर सर्जरी और उचित इलाज प्राप्त कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए सभी लोगों को प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। 

सबसे पहला कदम धूम्रपान छोड़ना है क्योंकि इससे सबसे ज्यादा खतरा होता है। सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क से भी जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा रेडॉन और रसायनों के संपर्क में रहने से भी बचने का प्रयास किया जाना चाहिए। वायु प्रदूषण के कारण होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए अच्छे क्वालिटी वाले मास्क का इस्तेमाल करें। 



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स्रोत और संदर्भ
Uniqueness of lung cancer in Southeast Asia

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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