किडनी, शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करने के साथ अपशिष्टों को बाहर निकालना होता है। इसके अलावा शरीर में द्रव और इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखने में भी किडनी का भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। सोचिए, अगर शरीर के इतने महत्वपूर्ण अंग में कोई समस्या आ जाए तो जीवन कितना कठिन हो सकता है? इस लेख में हम किडनी में होने वाली ऐसी ही एक गंभीर समस्या नेफ्रैटिस के बारे में बात करने जा रहे हैं। नेफ्रैटिस की स्थिति में किडनी के फंक्शनल यूनिट नेफ्रॉन में सूजन आ जाती है। सूजन की इस स्थिति में मेडिकल की भाषा में 'ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस' के नाम से जाना जाता है। यह स्थिति किडनी के सामान्य कार्यों को प्रभावित कर देती है, जिसके कारण तमाम तरह की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
सावधान: पेनकिलर-एंटीबायोटिक का करते हैं ज्यादा प्रयोग? हो जाएंगे किडनी की इस गंभीर बीमारी के शिकार
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नेफ्रैटिस के प्रकार के आधार पर इसके लक्षण अलग-अलग हों सकते हैं। सामान्य तौर पर किडनी में सूजन से संबंधी इस स्थिति में लोगों में इस तरह के लक्षण देखे जा सकते हैं।
- पेशाब करते समय दर्द या जलन
- बार-बार पेशाब आना।
- मूत्र से रक्त या मवाद आना।
- पेट में दर्द विशेषकर किडनी की तरफ।
- शरीर की सूजन, आमतौर पर चेहरे, हाथ और पैरों में।
- उल्टी- बुखार
- हाई ब्लड प्रेशर की समस्या।
क्यों होती है नेफ्रैटिस की समस्या?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नेफ्रैटिस, किडनी की आनुवांशिक बीमारियों में से एक है, यानी कि यदि आपके परिवार में किसी को किडनी की बीमारी रह चुकी है तो आपमें भी इसके होने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा एचआईवी और हेपेटाइटिस बी या सी जैसे संक्रमण के कारण भी नेफ्रैटिस की समस्या होने का खतरा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक जो लोग एंटीबायोटिक दवाओं, बहुत ज्यादा दर्द निवारक, नॉनस्टेरॉइडल या एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं का सेवन ज्यादा करते हैं उनमें भी किडनी की क्षति की समस्याओं का खतरा हो सकता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है। डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे से ग्रस्त लोगों में भी इसका खतरा अधिक रहता है।
कैसे किया जाता है नेफ्रैटिस का इलाज
डॉक्टरों के मुताबिक नेफ्रैटिस का उपचार उसके कारण और प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकता है। सामान्य तौर पर नेफ्रैटिस के इलाज के लिए दवाओं के साथ विशेष उपचार की आवश्यकता होती है जिससे की किडनी से अतिरिक्त तरल पदार्थ और हानिकारक प्रोटीन को खत्म किया जा सके। वहीं क्रोनिक नेफ्रैटिस के उपचार में डॉक्टर किडनी के सूजन को कम करने के लिए दवाइयां दे सकते हैं। जिन लोगों में यह समस्या ऑटो-इम्यून डिस्ऑर्डर के कारण होती है उन्हें इसके लिए विशेष इलाज की जरूरत हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इस समस्या का निदान और उपचार बेहद आवश्यक है। समय पर उपचार न हो पाने की स्थिति में किडनी खराब भी हो सकती है।
नेफ्रैटिस से कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों के मुताबिक बचाव के माध्यम से नेफ्रैटिस की समस्या को रोकना थोड़ा कठिन है, हालांकि जीवनशैली में कुछ परिवर्तन करके इसके जोखिमों को जरूर कम किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले शरीर के वजन को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक होता है। धूम्रपान करने से इसका जोखिम बढ़ सकता है इसलिए जिन लोगों में किडनी से संबंधित रोग का खतरा हो, उन्हें धूम्रपान की आदतों को बिल्कुल छोड़ देना चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज रोगियों को शुगर लेवल नियंत्रित रखने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि शुगर का स्तर बढ़ने का सीधा असर किडनी को प्रभावित कर सकता है। नियमित रूप से व्य़ायाम करने के साथ पौष्टिक आहार का सेवन करके नेफ्रैटिस की समस्या से काफी हद तक सुरक्षित रहा जा सकता है।
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स्रोत और संदर्भ:
What to know about nephritis
Acute Nephritis, all you want to know
अस्वीकरण नोट: यह लेख अंतरराष्ट्रीय मेडिकल वेवसाइट, हेल्थलाइन और मेडिकल न्यूज टुडे से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।