कैंसर वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। शरीर में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर कारक हो सकती है, इसके लक्षणों पर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर शरीर के किसी भी अंग में विकसित हो सकता है।
Cancer Risk: क्या एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है कैंसर? इस घातक रोग के बारे में ये बातें जाननी जरूरी
कैंसर के कारणों को जानिए
कैंसर के संक्रामक जोखिमों को जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि आखिर कैंसर होता क्यों है?
मायोक्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर के अधिकतर जोखिम वंशानुगत होते हैं, यानी कि अगर आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है तो आपमें इसके विकसित होने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा कुछ प्रकार के पर्यावरणीय कारक जैसे रसायनों का अधिक संपर्क, लाइफस्टाइल की गड़बड़ आदतें भी कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। बहुत ही दुर्लभ मामलों में, अगर किसी ने अंग प्रत्यारोपण कराया है और डोनर को कैंसर है तो इससे दूसरे व्यक्ति में भी कोशिकाओं के संचार होने का खतरा अधिक हो सकता है।
क्या एक से दूसरे को भी हो सकता है कैंसर?
अध्ययनकर्ता बताते हैं, कैंसर का खतरा एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। यानी कि निकट संपर्क या संभोग, चुंबन, स्पर्श, भोजन साझा करना या एक ही घर में रहने से कैंसर को खतरा दूसरे लोगों में बढ़ता नहीं देखा गया है। यानी इसे संक्रामक रोग नहीं माना जाता है। कैंसर एक व्यक्ति से दूसरे में तो नहीं फैलता है पर अगर शरीर में कहीं कैंसर हो जाए और इसका समय पर उपचार न किया जाए तो इसके पूरे शरीर में बढ़ने का खतरा जरूर हो सकता है।
संक्रमण से हो सकता है कैंसर
एक से दूसरे व्यक्ति में तो कैंसर का जोखिम नहीं होता है पर कुछ संक्रामक रोगों की स्थिति में आपको कैंसर हो सकता है। यानी कि कुछ प्रकार के वायरस को कैंसर कारक माना जा सकता है। विशेषतौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का अगर किसी को संक्रमण हो जाता है,विशेषकर महिलाओं में ये सर्वाइकल कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
समलैंगिक पुरुषों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण गुदा, मुख और लिंग कैंसर के मामले भी देखे जाते रहे हैं। वायरस के खतरे को कम कम करने वाली एचपीवी वैक्सीन लेने से इन प्रकार के कैंसर से बचाव किया जा सकता है।
मां से बच्चे में भी कैंसर का हो सकता है खतरा
जन्म के समय मां से बच्चे में कैंसर का खतरा होने का जोखिम भी कम देखा जाता है। आपके बच्चे के गर्भ में रहने के दौरान कैंसर प्लेसेंटा तक फैल सकता है, लेकिन शोध से पता चलता है कि यह बेहद दुर्लभ है। 2009 में, जापान में अक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल) से पीड़ित एक महिला की प्लेसेंटा के माध्यम से अजन्मे बच्चे में कैंसर कोशिकाएं पहुंची थीं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को कैंसर से बचाव के लिए निरंतर उपाय करते रहना चाहिए। लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखने के साथ रसायनों के संपर्क में आने से बचाव करके, शराब-धूम्रपान से दूरी बनाकर कैंसर के जोखिमों से बचाव करने में मदद मिल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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