चीन के वुहान शहर से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस से वैश्विक स्तर पर मरने वाले लोगों की संख्या 565 पहुंच गई है। इस वायरस के 28,273 मामलों की पुष्टि हुई है। मरने वाले लोगों में ज्यादातर चीन से हैं। चीन के बाद इस खतरनाक विषाणु से संक्रमित लोगों की संख्या जापान में है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में कोरोना वायरस के 45 मामलों की पुष्टि हुई है। इस बीच ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का वैक्सीन (टीका) बनाने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि इस टीके का ट्रायल अगले हफ्ते से जानवरों पर होगा।
कोरोना वायरस: वैज्ञानिकों ने बनाई दवा, जानवरों के बाद इंसानों पर होगा ट्रायल
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क्या है पूरा मामला?
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को रोकने के लिए टीका इजाद करने का दावा किया है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर और संक्रमण विशेषज्ञ रॉबिन शट्टॉक का कहना है कि उनकी टीम ने कोरोना वायरस का वैक्सीन खोज लिया है और अगले हफ्ते से इस वैक्सीन का ट्रायल जानवरों पर किया जाएगा। जानवरों पर इस टीके के सफल प्रयोग के बाद इसका ट्रायल इंसानों पर होगा।
अगर जानवरों पर इस टीके का ट्रायल सफल होता है तो यह कोरोना वायरस के इलाज में मील का पत्थर साबित होगा। बता दें कि अभी तक कोरोना वायरस के इलाज की कोई वैक्सीन नहीं बनी है। हालांकि, यह भी सच है कि जानवरों पर इस वैक्सीन का ट्रायल सफल होने के बाद भी इसके क्लिनिकल ट्रायल में करीब दो से तीन साल लग जाएंगे। खुद प्रोफेसर रॉबिन शट्टॉक का भी यह मानना है। गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने बुधवार को बताया था कि इस वायरस से सबसे ज्यादा मौतें हुबेई प्रांत में हुई है।
क्या है कोरोना वायरस?
कोरोना वायरस एक तरह का संक्रमित वायरस है जो कि सॉर्स परिवार से ताल्लुक रखता है। अभी तक इस वायरस के फैलने की असल वजह का पता नहीं चल पाया है। कहा जा रहा है कि यह वायरस चमकादड़ से सांप और सांप से मनुष्य में फैला। चीन में सांपों को खाया जाता है। सांपों के संपर्क में आने से इस वायरस का संक्रमण मनुष्य में हुआ और वुहान से यह वायरस दुनियाभर के देशों में फैला। इस वायरस के लक्षण निमोनिया की ही तरह हैं।
कोरोना वायरस के लक्षण
कोरोना वायरस में किसी भी तरह की कोई एंटीबायोटिक काम नहीं करती है। फ्लू में दी जाने वाली एंटीबायोटिक भी इस वायरस में काम नहीं करती है। अस्पताल में भर्ती कराए जाने वाले व्यक्ति के अंगों को फेल होने से बचाने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ दिया जाता है। जानवरों से फैलने वाले कोरोना वायरस सिवियर एक्यूट रेस्परेटरी सिंड्रोम (गंभीर श्वसन लक्षण) और मिडिल इस्टर्न रेस्परेटरी सिंड्रोम दोनों तरह का होता है।