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कोरोना से जंग: बूस्टर वैक्सीन को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा, ऐसे लोगों के लिए बताया बेहद आवश्यक

Tue, 24 Aug 2021 12:28 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 24 Aug 2021 12:28 PM IST
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booster dose of covid vaccine could protect from severe covid-19, Study says
कोरोना की बूस्टर डोज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

दुनियाभर में कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के बढ़ रहे मामलों को कम करने के लिए कई अध्ययनों में वैज्ञानिक, वैक्सीन की दो डोज को अपर्याप्त बता रहे हैं। अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कुछ महीनों के बाद वैक्सीन से शरीर में बनीं एंटीबॉडीज का स्तर कम हो जाता है, ऐसे में लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए तीसरे यानी कि बूस्टर डोज देने की आवश्यकता हो सकती है। कई देशों ने लोगों को बूस्टर डोज देने की शुरुआत भी कर दी है। इसी से संबंधित हाल के इजराइल में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने तीसरी डोज की आवश्यकताओं पर जोर दिया है।


तमाम अध्ययनों के निष्कर्ष के आधार पर इज़राइल के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डेटा में बताया गया है कि फाइजर वैक्सीन की तीसरी डोज 60 या उससे अधिक उम्र के लोगों को संक्रमण से काफी बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकती है। गौरतलब है कि इज़राइल दुनिया का पहला देश है जिसने 60 से अधिक आयु के लोगों के लिए जुलाई के अंत में बूस्टर शॉट्स को मंजूरी दी थी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश की 93 लाख की आबादी में से करीब 15 लाख लोगों को तीसरी खुराक मिल भी चुकी है।

booster dose of covid vaccine could protect from severe covid-19, Study says
अच्छी इम्यूनिटी के लिए जरूरी है बूस्टर शॉट (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

बूस्टर डोज लेने वालों की बढ़ जाती है प्रतिरक्षा
अध्ययन की रिपोर्ट में बताया गया है कि बूस्टर डोज लेने वाले लोगों के शरीर में 10 दिनों बाद बनी एंटीबॉडीज, वैक्सीन की केवल दो डोज लेने वाले की तुलना में चार गुना अधिक पाई गई। इसके अलावा  60 साल से अधिक की आयु वाले लोगों में बूस्टर शॉट लेने के बाद गंभीर संक्रमण और इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा छह गुना तक कम पाया गया। इस आधार पर शोधकर्ता लोगों को तीसरी डोज देने का सुझाव दे रहे हैं।

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कम हो सकता है कोरोना का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

संक्रमण से बेहतर सुरक्षा दे सकती है बूस्टर वैक्सीन
इज़राइल की प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक मैकाबी हेल्थ सर्विसेज द्वारा जारी किए गए अलग-अलग आंकड़ों के निष्कर्ष से पता चलता है कि बूस्टर शॉट लेने से 60 साल या उससे अधिक की आयु वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम 86 प्रतिशत और गंभीर संक्रमण का जोखिम 92 प्रतिशत तक कम हो सकता है। मैकाबी के मुख्य अधिकारी अनात एक्का ज़ोहर ने एक बयान में बताया, संक्रमण और गंभीर बीमारी दोनों के खिलाफ सुरक्षा देने में बूस्टर शॉट को प्रभावी पाया गया है। कोरोना के मौजूदा खतरे को कम करने के लिए लोगों को तीसरी डोज देना काफी जरूरी माना जा रहा है। 

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कई देशों में बूस्टर शॉट देने की हो चुकी है शुरुआत - फोटो : PTI

एफडीए भी दे चुका है बूस्टर शॉट को मंजूरी
कोरोना के खतरे को देखते हुए इजराइल के अलावा हाल ही में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने भी इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के लिए फाइजर/ बायोएनटेक या मॉडर्ना के टीकों की तीसरी खुराक लेने को मंजूरी दे दी है। एफडीए का कहना है कि जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो या जिनमें ऐसी स्थितियों का निदान किया जाए जिन्हें इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज के बराबर स्तर माना जाता है, ऐसे लोग तीसरी डोज ले सकते हैं। संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए ऐसे लोगों के लिए बूस्टर डोज लेना जरूरी माना जा रहा है। 

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कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए जरूरी है बूस्टर वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

भारत में भी उठ रही है बूस्टर डोज का मांग
भारत में भी लोगों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए बूस्टर शॉट देने पर चर्चा चल रही है। इसी आवश्यकता पर जोर देते हुए इसी महीने एक कार्यक्रमण के दौरान कोविशील्ड वैक्सीन की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला ने भी बूस्टर डोज देने पर जोर दिया था। उन्होंने बताया था कि वह खुद और कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी तीसरी डोज ले चुके हैं। वहीं वर्जीनिया विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजिस्ट और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ विलियम पेट्री ने भी इम्यूनोसप्रेशिव लोगों के लिए बूस्टर डोज की जरूरत पर जोर दिया था।


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नोट: यह लेख इज़राइल के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डेटा और तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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