दुनियाभर में कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के बढ़ रहे मामलों को कम करने के लिए कई अध्ययनों में वैज्ञानिक, वैक्सीन की दो डोज को अपर्याप्त बता रहे हैं। अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कुछ महीनों के बाद वैक्सीन से शरीर में बनीं एंटीबॉडीज का स्तर कम हो जाता है, ऐसे में लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए तीसरे यानी कि बूस्टर डोज देने की आवश्यकता हो सकती है। कई देशों ने लोगों को बूस्टर डोज देने की शुरुआत भी कर दी है। इसी से संबंधित हाल के इजराइल में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने तीसरी डोज की आवश्यकताओं पर जोर दिया है।
कोरोना से जंग: बूस्टर वैक्सीन को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा, ऐसे लोगों के लिए बताया बेहद आवश्यक
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बूस्टर डोज लेने वालों की बढ़ जाती है प्रतिरक्षा
अध्ययन की रिपोर्ट में बताया गया है कि बूस्टर डोज लेने वाले लोगों के शरीर में 10 दिनों बाद बनी एंटीबॉडीज, वैक्सीन की केवल दो डोज लेने वाले की तुलना में चार गुना अधिक पाई गई। इसके अलावा 60 साल से अधिक की आयु वाले लोगों में बूस्टर शॉट लेने के बाद गंभीर संक्रमण और इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा छह गुना तक कम पाया गया। इस आधार पर शोधकर्ता लोगों को तीसरी डोज देने का सुझाव दे रहे हैं।
संक्रमण से बेहतर सुरक्षा दे सकती है बूस्टर वैक्सीन
इज़राइल की प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक मैकाबी हेल्थ सर्विसेज द्वारा जारी किए गए अलग-अलग आंकड़ों के निष्कर्ष से पता चलता है कि बूस्टर शॉट लेने से 60 साल या उससे अधिक की आयु वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम 86 प्रतिशत और गंभीर संक्रमण का जोखिम 92 प्रतिशत तक कम हो सकता है। मैकाबी के मुख्य अधिकारी अनात एक्का ज़ोहर ने एक बयान में बताया, संक्रमण और गंभीर बीमारी दोनों के खिलाफ सुरक्षा देने में बूस्टर शॉट को प्रभावी पाया गया है। कोरोना के मौजूदा खतरे को कम करने के लिए लोगों को तीसरी डोज देना काफी जरूरी माना जा रहा है।
एफडीए भी दे चुका है बूस्टर शॉट को मंजूरी
कोरोना के खतरे को देखते हुए इजराइल के अलावा हाल ही में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने भी इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के लिए फाइजर/ बायोएनटेक या मॉडर्ना के टीकों की तीसरी खुराक लेने को मंजूरी दे दी है। एफडीए का कहना है कि जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो या जिनमें ऐसी स्थितियों का निदान किया जाए जिन्हें इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज के बराबर स्तर माना जाता है, ऐसे लोग तीसरी डोज ले सकते हैं। संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए ऐसे लोगों के लिए बूस्टर डोज लेना जरूरी माना जा रहा है।
भारत में भी उठ रही है बूस्टर डोज का मांग
भारत में भी लोगों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए बूस्टर शॉट देने पर चर्चा चल रही है। इसी आवश्यकता पर जोर देते हुए इसी महीने एक कार्यक्रमण के दौरान कोविशील्ड वैक्सीन की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला ने भी बूस्टर डोज देने पर जोर दिया था। उन्होंने बताया था कि वह खुद और कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी तीसरी डोज ले चुके हैं। वहीं वर्जीनिया विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजिस्ट और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ विलियम पेट्री ने भी इम्यूनोसप्रेशिव लोगों के लिए बूस्टर डोज की जरूरत पर जोर दिया था।
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नोट: यह लेख इज़राइल के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डेटा और तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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