कानों की समस्या विशेषकर कम सुनाई देना, बढ़ते उम्र के साथ होने वाली दिक्कत मानी जाती रही है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कम आयु के लोगों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके लिए जीवनशैली की गड़बड़ आदतों को प्रमुख कारण के तौर पर देखते हैं। शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि जीवनशैली की गड़बड़ी न केवल आपमें डायबिटीज और हृदय रोगों जैसी समस्याओं को बढ़ा देती है, साथ ही इसे बहरेपन के प्रमुख कारण के रूप में भी जाना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानों को स्वस्थ रखने और सुनने की शक्ति को बनाए रखने के लिए जीवनशैली की आदतों के साथ-साथ, आहार को ठीक रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।
आज का हेल्थ टिप्स: ये चार आदतें आपकी सुनने की क्षमता को कर सकती हैं प्रभावित, ऐसी गलतियों से बचें
बहुत अधिक शोर या तेज आवाज में गाने सुनना
ध्वनि प्रदूषण को बहरेपन के सबसे सामान्य और प्रमुख कारणों में से माना जाता है। तेज आवाज में संगीत सुनना, हेडफोन-इयरफोन की आवाज को काफी अधिक रखना आदि कानों को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। हेडफोन-इयरफोन के कारण पिछले कुछ वर्षों में यह समस्या काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी गई है। तेज आवाज के कारण कान के पर्दे पर अधिक दबाव पड़ता है जिसके कारण कई तरह की समस्याओं का जोखिम हो सकता है।
व्यायाम की कमी
गतिहीन जीवनशैली पूरे शरीर की क्षमता को नुकसान पहुंचाती है, कानों को भी इससे क्षति पहुंचने का जोखिम हो सकता है। व्यायाम की कमी, मधुमेह और रक्त संचार संबंधी परेशानियों को भी बढ़ा देती है, जिसके कारण कानों की समस्या बढ़ने का भी खतरा हो सकता है।
शोध बताते हैं कि जिन लोगों के आहार में कमी और गतिहीन जीवनशैली अधिक होती है, उनमें रक्त का संचरण प्रभावित हो सकता है, जिसका कानों की क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
शुरुआती संकेतों को अनदेखा करना
कान, शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक होते हैं, ऐसे में इनमें होने वाली किसी भी तरह की समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए। कान में दर्द या आवाज आने जैसे संकेत आंतरिक समस्याओं की ओर इशारा हो सकते हैं, जिसपर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। अगर इन शुरुआती संकेतों पर समय से ध्यान देकर इलाज करा लिया जाए तो बहरेपन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
धूम्रपान से कानों को नुकसान
धूम्रपान की आदत को सामान्यतौर पर फेफड़ों और हृदय के लिए गंभीर माना जाता है, पर अध्ययन बताते हैं कि इससे कानों की समस्या भी तेजी से बढ़ सकती है। सिगरेट के धुएं में मौजूद रसायन आपके कान की तंत्रिका और कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप सुनने की क्षमता कम हो जाती है। कम उम्र में बढ़ती बहरेपन की समस्या के लिए इस आदत को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है।
--------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।