दुनियाभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के नए मामले काफी चिंता बढ़ाने वाले हैं। भारत, चीन, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पिछले दिनों तेजी से हालात बिगड़ते नजर आए हैं। संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए विशेषज्ञ ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट BA.2 को प्रमुख कारक मान रहे हैं। अध्ययनों में BA.2 वैरिएंट को मूल ओमिक्रॉन से 10 गुना अधिक संक्रामकता वाला बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर नए केसों में इजाफा देखा जा रहा है इसके लिए नए वैरिएंट्स की अत्याधिक संक्रामकता और प्रकृति को एक बड़ा कारण माना जा सकता है। सब-वैरिएंट BA.2 के कारण जारी संकट के बीच विशेषज्ञों ने दो और नए सब-वैरिएंट्स को लेकर अलर्ट जारी किया है।
अध्ययन: ओमिक्रॉन BA.2 के बाद अब इन दो नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई चिंता, विशेषज्ञों ने एक और लहर की जताई आशंका
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BA.3 और BA.4 को लेकर अलर्ट
दक्षिण अफ्रीका स्थित अफ्रीकन हेल्थ रिसर्च के शोधकर्ताओं ने बताया कि ओमिक्रॉन के दो नए सब-वैरिएंट BA.4 और BA.5 एक नई लहर का संकेत दे रहे हैं। पिछले महीने, दक्षिण अफ्रीका के सेंटर फॉर एपिडेमिक रिस्पांस एंड इनोवेशन (सीईआरआई) के वैज्ञानिकों ने इन दो अत्यधिक संक्रामक ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के बारे में पता लगाया था।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन नए खतरों को लेकर हमें अभी से सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि इनकी प्रकृति और कई तरह की जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।
नए वैरिएंट्स की प्रकृति खतरनाक
सीईआरआई के निदेशक ट्यूलियो डी ओलिवेरा ने बताया कि नए सब-वैरिएंट्स BA.4 और BA.5 की प्रकृति ओमिक्रॉन के पुराने वैरिएंट्स से काफी अलग है। दिसंबर 2021-जनवरी 2022 के दौरान इन दो नए वैरिएंट्स के बारे में पता चला था। तब से अब तक ये दक्षिण अफ्रीका में सात प्रांतों के अलावा, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चीन, इज़राइल, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, पाकिस्तान, यूके, यूएस और स्विटजरलैंड सहित 20 से अधिक देशों में फैल चुका है। इन वैरिएंट्स का बढ़ना वैश्विक चुनौती का कारण बन सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इन वैरिएंट्स से होने वाले जोखिमों के बारे में जानने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 24 बिना वैक्सीनेशन वाले और 15 टीकाकरण करा चुके, लोगों में इसके प्रभाव को जानने के लिए अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष में पाया कि यह दोनों वैरिएंट्स, एंटीबॉडी उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं, साथ ही शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा देकर लोगों में संक्रमण का कारण बन सकते है। जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उन लोगों में इन दो नए वैरिएंट्स के कारण एंटीबॉडीज के उत्पादन में तीन गुना की कमी देखी गई।
गंभीर रोगों का खतरा?
अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन नहीं हुआ है, उन लोगों में यह वैरिएंट्स गंभीर रोगों का कारण बन सकते हैं। वहीं जिनका टीकाकरण हो चुका है उनमें भी यह संक्रमण को तो बढ़ा सकते हैं, हालांकि ऐसे लोगों में गंभीर समस्याओं का खतरा कम पाया गया है।
इन वैरिएंट्स की प्रकृति और संक्रामकता दर को जानने के लिए फिलहाल शोध जारी है, हालांकि प्रारंभिक अध्ययन यह जरूर बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर इसका प्रसार नई चुनौतियों को जन्म दे सकता है।